22 जब मूसा की व्यवस्था के अनुसार उनके शुद्ध होने के दिन पूरे हुए, तो वे उसे प्रभु को अर्पित करने के लिए यरूशलेम लाए 23 (जैसा प्रभु की व्यवस्था में लिखा है : प्रत्येक पहलौठा प्रभु के लिए पवित्र ठहरेगा।2:23 निर्गमन 13:2), 24 कि जो प्रभु की व्यवस्था में कहा गया उसके अनुसार, पंडुकों का एक जोड़ा या कबूतर के दो बच्चे बलिदान करें।2:24 लैव्य 12:8
शिमोन द्वारा यीशु के दर्शन
25 और देखो, यरूशलेम में शिमोन नामक एक मनुष्य था। वह धर्मी और भक्त मनुष्य था और इस्राएल की शांति की प्रतीक्षा कर रहा था, तथा पवित्र आत्मा उस पर था; 26 और पवित्र आत्मा के द्वारा उस पर यह प्रकट किया गया था कि जब तक वह प्रभु के मसीह को न देख ले, मृत्यु को न देखेगा। 27 वह आत्मा की प्रेरणा से मंदिर-परिसर में आया; और जब माता-पिता बालक यीशु को भीतर लाए कि व्यवस्था की विधि के अनुसार उसके साथ करें, 28 तो उसने बालक को गोद में लिया और परमेश्वर की स्तुति करते हुए कहा :
29 हे स्वामी,
अब तू अपने वचन के अनुसार
अपने दास को शांति से विदा कर;
30 क्योंकि मेरी आँखों ने
तेरे उद्धार को देख लिया
31 जिसे तूने सब लोगों के सामने
तैयार किया है,
32 कि वह गैरयहूदियों के लिए
प्रकाशन की ज्योति हो
और तेरी प्रजा इस्राएल की महिमा हो।
33 बालक के विषय में जो कहा गया, उससे उसके पिता और माता को आश्चर्य हुआ। 34 तब शिमोन ने उन्हें आशिष दी और उसकी माता मरियम से कहा, "देख, यह बालक इस्राएल में बहुतों के पतन और उत्थान के लिए और ऐसा चिह्न होने के लिए ठहराया गया है जिसका विरोध किया जाएगा 35 (और तलवार तेरे अपने प्राण को आर-पार छेदेगी), जिससे बहुतों के मन के विचार प्रकट होंगे।"
हन्नाह की साक्षी
36 अब आशेर के गोत्र से फनूएल की बेटी हन्नाह एक भविष्यवक्तिन थी। वह बहुत बूढ़ी हो गई थी, और विवाह के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रही, 37 और अब चौरासी वर्ष की विधवा थी। वह मंदिर को नहीं छोड़ती थी बल्कि दिन-रात उपवास और प्रार्थना के साथ सेवा करती रहती थी। 38 उसी घड़ी वह पास आकर परमेश्वर2:38 कुछ हस्तलेखों में "परमेश्वर" के स्थान पर "प्रभु" लिखा है। को धन्यवाद देने लगी और उन सब लोगों को जो यरूशलेम के छुटकारे की प्रतीक्षा कर रहे थे, उस बालक के विषय में बताने लगी।