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लूका रचित सुसमाचार 21

वधरह

34 "अपनिषय ें वधरहो, कहीं ऐसि मन , मतवपन और वन िंदब ँ, और वह िअचनक समपर पड़े। 35 ोंि वह िसतह पर रहनसब ों पर पड़ा। 36 इसलिहर समय गतऔर थनकरतरहि इन सब आनों बच िकलऔर मनमनखड़सको।"

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