नाईन नगर की विधवा
11 इसके बाद ऐसा हुआ कि यीशु नाईन नामक नगर को गया, और उसके साथ उसके7:11 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "बहुत से" लिखा है। शिष्य और एक बड़ी भीड़ चल रही थी। 12 जब वह नगर के फाटक के निकट पहुँचा, तो देखो, लोग एक मुरदे को ले जा रहे थे जो अपनी माँ का एकलौता पुत्र था; और उसकी माँ विधवा थी तथा नगर के बहुत लोग उसके साथ थे। 13 जब प्रभु ने उसे देखा तो उस पर तरस आया और उससे कहा,"रो मत।" 14 उसने पास आकर अरथी को छुआ, और अरथी उठानेवाले रुक गए, तब उसने कहा,"हे जवान, मैं तुझसे कहता हूँ, उठ।" 15 तब वह मृतक उठ बैठा और बोलने लगा, और यीशु ने उसे उसकी माता को सौंप दिया। 16 सब लोगों पर भय छा गया और वे परमेश्वर की महिमा करते हुए कहने लगे, "एक महान भविष्यवक्ता हमारे बीच में उठ खड़ा हुआ है," और "परमेश्वर ने अपने लोगों की सुधि ली है।" 17 यीशु के विषय में यह बात सारे यहूदिया और उसके आस-पास के हर क्षेत्र में फैल गई।