30 इसलिए तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने संपूर्ण मन और अपने संपूर्ण प्राण और अपनी संपूर्ण बुद्धि और अपनी संपूर्ण शक्ति से प्रेम रखना। 31 दूसरी यह है : तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।इनसे बड़ी और कोई आज्ञा नहीं।"
Publicidade
Publicidade
30 इसलिए तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने संपूर्ण मन और अपने संपूर्ण प्राण और अपनी संपूर्ण बुद्धि और अपनी संपूर्ण शक्ति से प्रेम रखना। 31 दूसरी यह है : तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।इनसे बड़ी और कोई आज्ञा नहीं।"