61 परंतु वह चुप रहा और उसने कोई उत्तर नहीं दिया। महायाजक ने उससे फिर पूछा, "क्या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है?" 62 यीशु ने कहा,"मैं हूँ! और तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान के दाहिनी ओर बैठा और आकाश के बादलों के साथ आता हुआ देखोगे।" 63 तब महायाजक ने अपने वस्त्र फाड़ते हुए कहा, "अब हमें और गवाहों की क्या आवश्यकता है? 64 तुमने यह निंदा सुनी, तुम्हारा क्या विचार है?" और उन सब ने उसे मृत्युदंड के योग्य ठहराया।
मरकुस रचित सुसमाचार 14:61-64
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- OHSS Hindi Contemporary Version
61 किंतु मसीह येशु ने कोई उत्तर न दिया. वह मौन ही बने रहे.
तब महापुरोहित ने उन पर व्यंग्य करते हुए पूछा, "क्या तुम ही मसीह हो—परम प्रधान के पुत्र?"
62 मसीह येशु ने उत्तर दिया, "जी हां, मैं हूं. आप मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान के दायें पक्ष में आसीन तथा आकाश के बादलों पर लौटता हुआ देखेंगे."
63 इस पर महापुरोहित ने अपने वस्त्र फाड़ते हुए कहा, "अब क्या ज़रूरत रह गई किसी अन्य गवाह की? 64 तुम सभी ने परमेश्वर-निंदा सुन ली है. क्या विचार है तुम्हारा?"
सबने एक मत से उन्हें मृत्यु दंड का भागी घोषित किया.
- IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019
61 परन्तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया। महायाजक ने उससे फिर पूछा, "क्या तू उस परमधन्य का पुत्र मसीह है?" 62 यीशु ने कहा, "हाँ मैं हूँ:
और तुम मनुष्य के पुत्र को
सर्वशक्तिमान की दाहिनी ओर बैठे,
और आकाश के बादलों के साथ आते देखोगे।" (दानि. 7:13, भज. 110:1)
63 तब महायाजक ने अपने वस्त्र फाड़कर कहा, "अब हमें गवाहों का क्या प्रयोजन है? (मत्ती 26:65) 64 तुम ने यह निन्दा सुनी। तुम्हारी क्या राय है?" उन सब ने कहा यह मृत्युदण्ड के योग्य है। (लैव्य. 24:16)
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