25 एक स्त्री थी जो बारह वर्ष से रक्तस्राव से पीड़ित थी। 26 उसने अनेक वैद्यों के हाथों बहुत दुःख उठाया और अपना सब कुछ खर्च करने पर भी उसे कुछ लाभ नहीं हुआ बल्कि उसकी दशा और भी अधिक बिगड़ गई। 27 उसने यीशु के विषय में सुना और भीड़ में पीछे से आकर उसका वस्त्र छू लिया, 28 क्योंकि उसका कहना था, "यदि मैं उसके वस्त्र ही को छू लूँगी तो मैं स्वस्थ हो जाऊँगी।" 29 तब तुरंत उसका रक्तस्राव बंद हो गया और उसने अपनी देह में जान लिया कि वह इस बीमारी से अच्छी हो गई है।