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मरकुस रचित सुसमाचार 7

11 परकहतयदि अपनिअपनकहि ें झसिलना, वह "रब" अरपरम्‍वर अरिै, 12 उसअपनिअपनिकरननहीं पड़ता।’ 13 अपनपरपरिमनबनरखै, परम्‍वर वचन यरठहरऔर इसरकऔर बहकरतो।"

मनअशकरनें

14 तब उसनिऔर उनसकहा,"सब और समझो! 15 वसहर मनतर कर उसअशनहीं कर सकती, बलि मनतर िकलतैं उसअशकरतैं।

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