20 फिर उसने कहा,"जो मनुष्य में से निकलता है वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। 21 क्योंकि भीतर, अर्थात् मनुष्य के मन से बुरे-बुरे विचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, 22 परस्त्रीगमन, लोभ, दुष्टता, छल, कामुकता, कुदृष्टि, निंदा, अहंकार और मूर्खता निकलती हैं। 23 ये सब बुरी बातें भीतर से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं।"
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मरकुस रचित सुसमाचार 7:20-23
HSB Hindi Standard Bible
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- OHSS Hindi Contemporary Version
20 "जो मनुष्य में से बाहर आता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है. 21 मनुष्य के भीतर से—मनुष्य के हृदय ही से—बुरे विचार बाहर आते हैं, जो उसे चोरी, हत्या, व्यभिचार, 22 लोभ, दुराचारिता, छल-कपट, कामुकता, जलन, निंदा, अहंकार तथा मूर्खता की ओर लगा देते हैं. 23 ये सभी अवगुण मनुष्य के अंदर से बाहर आते तथा उसे अशुद्ध करते हैं."
- IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019
20 फिर उसने कहा, "जो मनुष्य में से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। 21 क्योंकि भीतर से, अर्थात् मनुष्य के मन से, बुरे-बुरे विचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन, 22 लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। 23 ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं।"
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