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रोमियों 10:13-17

HSB Hindi Standard Bible

13 क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।10:13 योएल 2:32

इस्राएल द्वारा संदेश का इनकार

14 परंतु जिस पर उन्होंने विश्‍वास नहीं किया उसे वे कैसे पुकारें? और जिसके विषय में उन्होंने सुना नहीं उस पर वे कैसे विश्‍वास करें? और बिना प्रचार करनेवाले के वे कैसे सुनें? 15 और यदि उन्हें भेजा न जाए तो वे कैसे प्रचार करें? जैसा लिखा है : उनके पैर कितने सुहावने हैं जो10:15 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "शांति का शुभ-संदेश और" लिखा है। भली बातों का सुसमाचार सुनाते हैं।10:15 यशायाह 52:7

16 परंतु सब ने सुसमाचार को नहीं माना। यशायाह कहता है : हे प्रभु, किसने हमारे संदेश पर विश्‍वास किया?10:16 यशायाह 53:1 17 अतः विश्‍वास सुनने से, और सुनना मसीह10:17 कुछ हस्तलेखों में "मसीह" के स्थान पर "परमेश्‍वर" लिखा है। के वचन के द्वारा होता है।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    13 क्योंकि हर एक, जो प्रभु को पुकारेगा, उद्धार प्राप्‍त करेगा.10:13 योए 2:32

    14 वे भला उन्हें कैसे पुकारेंगे जिनमें उन्होंने विश्वास ही नहीं किया? वे भला उनमें विश्वास कैसे करेंगे, जिन्हें उन्होंने सुना ही नहीं? और वे भला सुनेंगे कैसे यदि उनकी उद्घोषणा करनेवाला नहीं? 15 और प्रचारक प्रचार कैसे कर सकेंगे यदि उन्हें भेजा ही नहीं गया? जैसा कि पवित्र शास्त्र का लेख है: कैसे सुहावने हैं वे चरण जिनके द्वारा अच्छी बातों का सुसमाचार लाया जाता है!10:15 यशा 52:7

    16 फिर भी सभी ने ईश्वरीय सुसमाचार पर ध्यान नहीं दिया. भविष्यवक्ता यशायाह का लेख है: "प्रभु! किसने हमारी बातों पर विश्वास किया?"10:16 यशा 53:1 17 इसलिये स्पष्ट है कि विश्वास की उत्पत्ति होती है सुनने के माध्यम से तथा सुनना मसीह के वचन के माध्यम से.

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    13 क्योंकि "जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।" (प्रेरि. 2:21, योए. 2:32)

    14 फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्यों लें? और जिसकी नहीं सुनी उस पर क्यों विश्वास करें? और प्रचारक बिना क्यों सुनें? 15 और यदि भेजे न जाएँ, तो क्यों प्रचार करें? जैसा लिखा है, "उनके पाँव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं!" (यशा. 52:7, नहू. 1:15) 16 परन्तु सब ने उस सुसमाचार पर कान न लगाया। यशायाह कहता है, "हे प्रभु, किसने हमारे समाचार पर विश्वास किया है?" (यशा. 53:1) 17 इसलिए विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन से होता है।

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