14 परंतु जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया उसे वे कैसे पुकारें? और जिसके विषय में उन्होंने सुना नहीं उस पर वे कैसे विश्वास करें? और बिना प्रचार करनेवाले के वे कैसे सुनें? 15 और यदि उन्हें भेजा न जाए तो वे कैसे प्रचार करें? जैसा लिखा है : उनके पैर कितने सुहावने हैं जो भली बातों का सुसमाचार सुनाते हैं।
16 परंतु सब ने सुसमाचार को नहीं माना। यशायाह कहता है : हे प्रभु, किसने हमारे संदेश पर विश्वास किया? 17 अतः विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन के द्वारा होता है।