मसीह में नया जीवन
1 तो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें कि अनुग्रह बढ़ता रहे? 2 कदापि नहीं! हम जो पाप के प्रति मर गए तो अब उसमें कैसे जीवन बिताएँ?
1 तो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें कि अनुग्रह बढ़ता रहे? 2 कदापि नहीं! हम जो पाप के प्रति मर गए तो अब उसमें कैसे जीवन बिताएँ?
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