15 इसलिए जो मैं करता हूँ उसे समझ नहीं पाता, क्योंकि जो मैं चाहता हूँ वह मैं नहीं करता, बल्कि जिससे घृणा करता हूँ, वही करता हूँ। 18 क्योंकि मैं जानता हूँ कि मुझमें, अर्थात् मेरे शरीर में कोई भली वस्तु वास नहीं करती। मुझमें इच्छा तो है परंतु मुझसे भले कार्य नहीं हो पाते; 19 और जो भला मैं करना चाहता हूँ, वह नहीं करता बल्कि जो बुरा मैं नहीं करना चाहता, वही मैं करता हूँ।
24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूँ! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा? 25 हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद हो। इसलिए अब एक ओर तो मैं अपने मन से परमेश्वर की व्यवस्था की, और दूसरी ओर शरीर से पाप की व्यवस्था की सेवा करता हूँ।