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रोमियों 7:15,18,19,24,25

HSB Hindi Standard Bible

15 इसलिए जो मैं करता हूँ उसे समझ नहीं पाता, क्योंकि जो मैं चाहता हूँ वह मैं नहीं करता, बल्कि जिससे घृणा करता हूँ, वही करता हूँ। 18 क्योंकि मैं जानता हूँ कि मुझमें, अर्थात् मेरे शरीर में कोई भली वस्तु वास नहीं करती। मुझमें इच्छा तो है परंतु मुझसे भले कार्य नहीं हो पाते; 19 और जो भला मैं करना चाहता हूँ, वह नहीं करता बल्कि जो बुरा मैं नहीं करना चाहता, वही मैं करता हूँ।

24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूँ! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा? 25 हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्‍वर का धन्यवाद हो। इसलिए अब एक ओर तो मैं अपने मन से परमेश्‍वर की व्यवस्था की, और दूसरी ओर शरीर से पाप की व्यवस्था की सेवा करता हूँ।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    15 यह इसलिये कि यह मेरी समझ से हमेशा से परे है कि मैं क्या करता हूं—मैं वह नहीं करता, जो मैं करना चाहता हूं परंतु मैं वही करता हूं, जिससे मुझे घृणा है. 18 यह तो मुझे मालूम है कि मुझमें अर्थात् मेरे शरीर में अंदर छिपा हुआ ऐसा कुछ भी नहीं, जो उत्तम हो. अभिलाषा तो मुझमें है किंतु उसका करना मुझसे हो नहीं पाता. 19 वह हित, जिसकी मुझमें अभिलाषा है, मुझसे करते नहीं बनता परंतु हो वह जाता है, जिसे मैं करना नहीं चाहता.

    24 कैसी दयनीय स्थिति है मेरी! कौन मुझे मेरी इस मृत्यु के शरीर से छुड़ाएगा? 25 धन्यवाद हो परमेश्वर का जो हमारे प्रभु येशु मसीह के द्वारा हमें छुड़ाते हैं!

    एक ओर तो मैं स्वयं अपने मस्तिष्क में परमेश्वर की व्यवस्था का दास हूं किंतु दूसरी ओर अपने शरीर में अपने पाप के स्वभाव का.

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    15 और जो मैं करता हूँ उसको नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूँ वह नहीं किया करता, परन्तु जिससे मुझे घृणा आती है, वही करता हूँ। 18 क्योंकि मैं जानता हूँ, कि मुझ में अर्थात् मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझसे बन नहीं पड़ते। (उत्प. 6:5) 19 क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूँ, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता, वही किया करता हूँ।

    24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूँ! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा7:24 कौन छुड़ाएगा: मन की परिस्थिति गम्भीर पीड़ा में, और उसका विवेक स्वयं की कमजोरी में, और मदद की तलाश में देख रहे हैं।? 25 हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद हो। इसलिए मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था की सेवा करता हूँ।

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