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रोमियों 8:1-11

जीवनदायक पवित्र आत्मा

1 अतः अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दंड की आज्ञा नहीं; [वे शरीर के अनुसार नहीं बल्कि आत्मा के अनुसार चलते हैं।]8:1 कुछ हस्तलेखों में यह भाग भी पाया जाता है। 2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में तुम्हें8:2 कुछ हस्तलेखों में "तुम्हें" के स्थान पर "हमें" लिखा है। पाप और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया है। 3 जो कार्य शरीर के दुर्बल होने के कारण व्यवस्था से असंभव था, उसे परमेश्‍वर ने किया अर्थात् अपने पुत्र को पापमय शरीर की समानता में और पापबलि होने के लिए भेजकर शरीर में पाप को दोषी ठहराया, 4 ताकि हममें जो शरीर के अनुसार नहीं बल्कि आत्मा के अनुसार चलते हैं, व्यवस्था की माँग पूरी हो सके। 5 क्योंकि शारीरिक व्यक्‍ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं, परंतु आत्मिक व्यक्‍ति आत्मा की बातों पर। 6 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परंतु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शांति है। 7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्‍वर से शत्रुता करना है, वह न तो परमेश्‍वर की व्यवस्था के अधीन है, और न हो सकता है; 8 और जो शारीरिक हैं वे परमेश्‍वर को प्रसन्‍न नहीं कर सकते।

9 परंतु यदि परमेश्‍वर का आत्मा तुममें वास करता है, तो तुम शारीरिक नहीं बल्कि आत्मिक हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं, तो वह मसीह का नहीं है। 10 यदि मसीह तुममें है, तो पाप के कारण देह मरी हुई है, परंतु धार्मिकता के कारण आत्मा जीवित है। 11 यदि उसका आत्मा जिसने यीशु को मृतकों में से जिलाया तुममें वास करता है, तो जिसने मसीह को मृतकों में से जिलाया वह तुम्हारी मरणशील देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुममें वास करता है, जीवन देगा।

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