पवित्र आत्मा की सेवा
12 इसलिए अब हे भाइयो, हम शरीर के ऋणी नहीं हैं कि शरीर के अनुसार जीवन बिताएँ; 13 क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार जीवन बिताते हो तो तुम्हें मरना ही है, परंतु यदि आत्मा के द्वारा देह के कार्यों को मार डालते हो तो जीवित रहोगे। 14 अतः जितने परमेश्वर के आत्मा के द्वारा चलाए जाते हैं, वे परमेश्वर की संतान हैं। 15 क्योंकि तुम्हें दासत्व की आत्मा नहीं मिली कि फिर भयभीत हो जाओ, बल्कि तुम्हें लेपालकपन का आत्मा मिला है, जिसके द्वारा हम "हे अब्बा, हे पिता" पुकारते हैं। 16 आत्मा स्वयं हमारी आत्मा के साथ यह साक्षी देता है कि हम परमेश्वर की संतान हैं। 17 अब यदि संतान हैं, तो उत्तराधिकारी भी—परमेश्वर के उत्तराधिकारी, और मसीह के सह-उत्तराधिकारी—जबकि हम उसके साथ महिमा पाने के लिए उसके साथ दुःख उठाते हैं।