12 धनय ह वह मनषय ज परकष म धरज धरत ह कयक वह खर उतरकर जवन क वह मकट पएग जसक परतजञ परभ न अपन परम रखनवल स क ह। 13 परकष क समय कई यह न कह क मर परकष परमशवर क ओर स क ज रह ह; कयक परमशवर क न त बर बत स परकष ह सकत ह, और न वह सवय कस क परकष करत ह। 14 परत परतयक वयकत अपन ह अभलष दवर खचकर और फसकर परकष म पड़त ह; 15 फर अभलष गरभवत हकर पप क जनम दत ह, और पप बढ़कर मतय क उतपनन करत ह।
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