14 परंतु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा द्वारा खिंचकर और फँसकर परीक्षा में पड़ता है; 15 फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जन्म देती है, और पाप बढ़कर मृत्यु को उत्पन्न करता है।
14 परंतु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा द्वारा खिंचकर और फँसकर परीक्षा में पड़ता है; 15 फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जन्म देती है, और पाप बढ़कर मृत्यु को उत्पन्न करता है।