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1 यूहन्ना 4:7-10,16,19

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

प्रेम द्वारा परमेश्वर को जानना

7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है और परमेश्वर को जानता है। 8 जो प्रेम नहीं रखता वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इससे प्रगट हुआ कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है कि हम उसके द्वारा जीवन पाएँ। 10 प्रेम इसमें नहीं कि हमने परमेश्वर से प्रेम किया पर इसमें है, कि उसने हम से प्रेम किया और हमारे पापों के प्रायश्चित के लिये अपने पुत्र को भेजा।

16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस पर विश्वास है। परमेश्वर प्रेम है; जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उसमें बना रहता है। 19 हम इसलिए प्रेम करते हैं, क्योंकि पहले उसने हम से प्रेम किया।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    7 प्रिय भाई बहनो, हममें आपसी प्रेम रहे: प्रेम परमेश्वर से उत्पन्‍न हुआ है. हर एक, जिसमें प्रेम है, परमेश्वर से जन्मा है तथा उन्हें जानता है. 8 वह जिसमें प्रेम नहीं, परमेश्वर से अनजान है क्योंकि परमेश्वर प्रेम हैं. 9 हममें परमेश्वर का प्रेम इस प्रकार प्रकट हुआ: परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को संसार में भेजा कि हम उनके द्वारा जीवन प्राप्‍त करें. 10 प्रेम वस्तुतः यह है: परमेश्वर ने हमारे प्रति अपने प्रेम के कारण अपने पुत्र को हमारे पापों के लिए प्रायश्चित बलि होने के लिए भेज दिया—यह नहीं कि हमने परमेश्वर से प्रेम किया है.

    16 हमने अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम को जान लिया और उसमें विश्वास किया है.

    परमेश्वर प्रेम हैं. वह, जो प्रेम में स्थिर है, परमेश्वर में बना रहता है तथा स्वयं परमेश्वर उसमें बना रहता हैं.

    19 हम प्रेम इसलिये करते हैं कि पहले उन्होंने हमसे प्रेम किया है.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    7 हे प्रियो, हम एक दूसरे से प्रेम रखें, क्योंकि प्रेम परमेश्‍वर से है, और प्रत्येक जो प्रेम रखता है वह परमेश्‍वर से उत्पन्‍न‍ हुआ है और परमेश्‍वर को जानता है। 8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्‍वर को नहीं जानता, क्योंकि परमेश्‍वर प्रेम है। 9 परमेश्‍वर का प्रेम हमारे बीच इससे प्रकट हुआ कि परमेश्‍वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेज दिया कि हम उसके द्वारा जीवित रहें। 10 प्रेम इसमें नहीं कि हमने परमेश्‍वर से प्रेम रखा, बल्कि इसमें है कि परमेश्‍वर ने हमसे प्रेम रखा और अपने पुत्र को हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिए भेजा।

    16 जो प्रेम परमेश्‍वर हमसे रखता है उसे हम जान गए हैं, और हमने उस पर विश्‍वास किया है।

    परमेश्‍वर प्रेम है, और जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्‍वर में बना रहता है और परमेश्‍वर उसमें बना रहता है। 19 हम4:19 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "उससे" लिखा है। इसलिए प्रेम रखते हैं, क्योंकि उसने पहले हमसे प्रेम रखा।

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