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1 Pedro 1

भकमन

1 पतरस ओर मसिै, उन परदिों , , गलिा, कपपदिा, आसिा, और ििें ितर-बितर कर रहतैं। 2 और परमवर िभविअन, पविआतपविकरनआजनने, और मसलहििगए ैं1:2 परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार, .... चुने गए हैं: इसका अर्थ यह है कि परमेश्वर सभी घटनाओं को जो घटित होती हैं, उसे पहले से ही जानता हैं, और दिखाता हैं कि उन लोगों को दूसरे की तुलना में उन्हें क्यों चुना।

ें अतयनअनरह और ि िलतरहे।

एक वरिसत

3 हमरभमसपरमवर और िधनयवो, िसनमसमरें उठना, अपनबड़ी दयहमें िआशिनयजनिा, 4 अरएक अविऔर िमल, और अजर िसत ििवरें रखै, 5 िनकरकपरमवर मरे, ि1:5 विश्वास के द्वारा: अर्थात्, वह सामर्थ्य के परिश्रम मात्र के द्वारा हमें नहीं रखता हैं, परन्तु वह हमारे मनों में विश्वास भी पैदा करता हैं। उस उदिे, आनसमय ें रगट ै, ै। 6 इस रण मगन ो, यदयपि अवशि अब ितक रकपररण ुःें ो, 7 और यह इसलिि परखि, आग शवकहीं अधिबहै, मसरगट पर रशा, महिा, और आदर रण ठहरे। (अयू. 23:10, भज. 66:10, यशा. 48:10, ू. 1:12) 8 उससिरखतो, और अब उस पर ििकरकऐसआननिऔर मगन ो, वरणन हर और महिभरै, 9 और अपनिरतिफल अरआतउदकरतो।

नबिों

10 इसउदिषय ें उन भवियदवकबहूँ़-ाँऔर ाँच-पडी, िोंउस अनरह िषय ें पर ा, भवियदी। 11 उनोंइस ि मसआतउनमें ा, और पहलमसुःों और उनकमहिगवा, वह और समय ओर करता। (2 पत. 1:21, यशा. 52:13-14, 24:25-27) 12 उन पर यह रगट िगयि अपननहीं वरनिें कहकरते, िनकसमअब ें उनकििोंपविआतवरगया, ें समा, और इन ों वरगदखनलसरखतैं।

पविवन हट

13 इस रण अपनी-अपनि कमर ाँधकर, और सचरहकर उस अनरह आशरखो, मसरगट समय ें िलनै। 14 और आजलकों समअपनअजनतसमय अभिसदबनो। 15 पर पविै, अपनल-चलन ें पविबनो। 16 ोंि िै, "पविबनो, ोंि ैं पविूँ1:16 पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ: आज्ञा की नींव यह हैं कि वे परमेश्वर ने कहा कि वे उनके लोगों के रूप में हैं, और क्योंकि वे परमेश्वर की प्रजा हैं इसलिए उन्हें परमेश्वर के जैसे पवित्र बनना चाहिए।" (. 11:44, . 19:2, . 20:7) 17 और जबकि , िा’ कहकर उससथनकरतो, िपकषपहर एक अनकरतै, अपनपरदसमय भय ि(2 इति. 19:7, भज. 28:4, यशा. 59:18, ि. 3:19, ि. 17:10) 18 ोंि नति िकमल-चलन वजों चलआतउससटकाँी-अरशववसनहीं , (भज. 49:7-8, गला. 1:4, यशा. 52:3) 19 पर िऔर िकलअरमसबहलह20 मसजगत ि पहलगया, पर अब इस अनिें िरगट 21 उसकउस परमवर पर िकरतो, िसनउसमरें िा, और महिि िऔर आशपरमवर पर ो।

22 अतजबकि ईचिकपट ििसतननअपनमनों पवििै, तन-मन लगकर एक सरअधिरखो। 23 ोंि शवनहीं पर अविपरमवर िऔर सदठहरनवचन नयजनै। 24 ोंि "हर एक समै, और उसकसमै:

ै, और झडै।

25 परनरभवचन िरहत1:25 प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है: संसार की सभी क्रांतियों और प्राकृतिक वस्तुओं की लुप्त‍ होती गौरव और मनुष्यों की नाश होती सामर्थ्य के बीच, परमेश्वर की सच्चाई, बिना किसी प्रभाव के सदा स्थिर रहता हैं।"

और यह समवचन ें गया। (16:17, 1 . 1:1, यशा. 40:8)

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