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1 Pedro 3

पतिाँ

1 पतिों, अपनपति अधरहो। इसलिि यदि इनमें ऐसों वचन नतों, 2 भय सहिपविल-चलन खकर िवचन अपनी-अपनपतल-चलन िंँ। 3 और ृंिवट3:3 तुम्हारा श्रृंगार दिखावटी न हो: यह उनके लिए मुख्य या सिद्धान्तिक बात न हो; उनका मन इन बातों पर न लगे।, अरूँथने, और गहने, ाँि-ाँि कपड़े पहनना। 4 वरनिऔर मनयत, नमरतऔर मन नतअविसजवट सजिरहे, ोंि परमवर ि ें इसकबड़ा ै। 5 और वकें पवििाँ ी, परमवर पर आशरखतीं, अपनआपकइसि रतऔर अपने-अपनपति अधरहतीं। 6 अबहम आजनतऔर उसकहती। अतयदि भलकरऔर िरकभय भयभउसकिाँ ठहरी।

पति

7 पतिों, िपतिों वन िकरऔर िबल 3:7 निर्बल पात्र: यह इसलिए किया जाता है क्योंकि यह शरीर मिट्टी के जैसा निर्बल और कमजोर पात्र हैं जो आसानी से टूट जाता हैं। नकर उसकआदर करो, यह समझकर ि हम ों वन वरदिैं, िससथनँ।

आशिहट

8 अतसब सब एक मन और दयऔर ईचरखने, और करमय, और नमबनो। 9 बदलमत करऔर बदलो; पर इसकिपरआशो: ोंि आशििगए ो। 10 ोंि

"वन इचरखतै,

और अचिखनहतै,

वह अपने,

और अपनों छल ें करनरहे।

11 वह ़े, और भलकरे;

वह िूँ़े, और उसकयतें रहे।

12 ोंि रभें धरिों पर लगरहतैं,

और उसकउनकिनतओर लगरहतैं3:12 उसके कान उनकी विनती की ओर लगे रहते हैं: वह उनकी प्रार्थनाएँ सुनाता हैं। क्योंकि परमेश्वर प्रार्थना सुननेवाला हैं, इसलिए हम उसके पास जाने के लिए और अपनी इच्छाओं को बताने के लिए हर समय स्वतंत्र हैं।,

परनरभकरनों िरहतै।" (भज. 34:15,16, . 9:31, ि. 15:29)

भलकरनरण सत

13 यदि भलकरनें उतिरहकरनिै? 14 यदि िकतरण ुःउठ, धनो; पर उनकडरमत डरो, और घबर, 15 पर मसरभनकर अपने-अपनमन ें पविसमझो, और आशिषय ें े, उसउततर िसरवदरहो, पर नमरतऔर भय ; 16 और िरखो, इसलिि िों िषय ें बदनउनकिषय ें े, मसें अचल-चलन अपमकरतैं, लजिों। 17 ोंि यदि परमवर यहइचि भलकरनरण ुःउठ, यह करनरण ुःउठउततम ै।

मसुः

18 इसलिि मसी, अरअधरिों िधरों रण एक ुःउठा, ि हमें परमवर पहुँ; वह शरगया, पर आतिगया। 19 उसें उसनकर आतरचिा। 20 िोंउस समय ें आजजब परमवर िों ें रज धरकर ठहररहा, और वह जहबन रहा, िसमें ठकर अरआठ बच गए21 और उसी, अरबपतिा, मसउठना, अब ें बचै; उससशरकरनअरनहीं ै, परनिपरमवर वश ें अरै। 22 वह वरपर कर परमवर िओर िजमै; और वरगदों, अधििों और शकिों उसकअधिगयै। (इफि. 1:20,21, भज. 110:1)

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