10 वह मन में व्याकुल होकर यहोवा से प्रार्थना करने और बिलख-बिलख कर रोने लगी। 11 और उसने यह मन्नत मानी, "हे सेनाओं के यहोवा, यदि तू अपनी दासी के दुःख पर सचमुच दृष्टि करे, और मेरी सुधि ले, और अपनी दासी को भूल न जाए, और अपनी दासी को पुत्र दे, तो मैं उसे उसके जीवन भर के लिये यहोवा को अर्पण करूँगी, और उसके सिर पर छुरा फिरने न पाएगा।" (लूका 1:48)
15 हन्ना ने कहा, "नहीं, हे मेरे प्रभु, मैं तो दुःखिया हूँ; मैंने न तो दाखमधु पिया है और न मदिरा, मैंने अपने मन की बात खोलकर यहोवा से कही है। 17 एली ने कहा, "कुशल से चली जा; इस्राएल का परमेश्वर तुझे मन चाहा वर दे।" (मर. 5:34) 20 तब हन्ना गर्भवती हुई और समय पर उसके एक पुत्र हुआ, और उसका नाम शमूएल1:20 शमूएल: अर्थात् परमेश्वर ने सुन ली: क्योंकि वह प्रार्थना के उत्तर में उत्पन्न हुआ था। रखा, क्योंकि वह कहने लगी, "मैंने यहोवा से माँगकर इसे पाया है।"