10 वह मन में व्याकुल होकर यहोवा से प्रार्थना करने और बिलख-बिलख कर रोने लगी। 11 और उसने यह मन्नत मानी, "हे सेनाओं के यहोवा, यदि तू अपनी दासी के दुःख पर सचमुच दृष्टि करे, और मेरी सुधि ले, और अपनी दासी को भूल न जाए, और अपनी दासी को पुत्र दे, तो मैं उसे उसके जीवन भर के लिये यहोवा को अर्पण करूँगी, और उसके सिर पर छुरा फिरने न पाएगा।" (लूका 1:48)
12 जब वह यहोवा के सामने ऐसी प्रार्थना कर रही थी, तब एली उसके मुँह की ओर ताक रहा था। 13 हन्ना मन ही मन कह रही थी; उसके होंठ तो हिलते थे परन्तु उसका शब्द न सुन पड़ता था; इसलिए एली ने समझा कि वह नशे में है। 14 तब एली ने उससे कहा, "तू कब तक नशे में रहेगी? अपना नशा उतार।" 15 हन्ना ने कहा, "नहीं, हे मेरे प्रभु, मैं तो दुःखिया हूँ; मैंने न तो दाखमधु पिया है और न मदिरा, मैंने अपने मन की बात खोलकर यहोवा से कही है। 16 अपनी दासी को ओछी स्त्री न जान, जो कुछ मैंने अब तक कहा है, वह बहुत ही शोकित होने और चिढ़ाई जाने के कारण कहा है।" 17 एली ने कहा, "कुशल से चली जा; इस्राएल का परमेश्वर तुझे मन चाहा वर दे।" (मर. 5:34) 18 उसने कहा, "तेरी दासी तेरी दृष्टि में अनुग्रह पाए।" तब वह स्त्री चली गई और खाना खाया, और उसका मुँह फिर उदास न रहा1:18 उसका मुँह फिर उदास न रहा: हन्ना ने अपनी चिन्ता परमेश्वर पर डाल दी थी, अत: उसके दिल पर से बोझ हट गया था। अब वह पारिवारिक भोज में आई और सहर्ष भोजन किया। । 19 वे सवेरे उठ यहोवा को दण्डवत् करके रामाह में अपने घर लौट गए। और एल्काना अपनी स्त्री हन्ना के पास गया, और यहोवा ने उसकी सुधि ली; 20 तब हन्ना गर्भवती हुई और समय पर उसके एक पुत्र हुआ, और उसका नाम शमूएल1:20 शमूएल: अर्थात् परमेश्वर ने सुन ली: क्योंकि वह प्रार्थना के उत्तर में उत्पन्न हुआ था। रखा, क्योंकि वह कहने लगी, "मैंने यहोवा से माँगकर इसे पाया है।"