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1 शमूएल 2

हनथन

1 तब हनथनकरककहा,

"मन यहरण मगन ै;

ींयहरण ै।

ुँशतिगया,

ोंि ैं िउदआननिूँ। (1:46,47)

2 "यहपविनहीं,

ोंि झकऔर नहीं;

और हमपरमवर समचटनहीं ै।

3 लकर अहओर ें मत करो,

और ें ुँिकलें;

ोंि यहपरमवर ै,

और ों लनै।

4 रवों धनगए,

और कर ों कमर ें बल ेंकसगया।

5 भरतउनें िमजदकरनपड़ी,

िऐसरहे।

वरनाँउसक,

और अनलकों लतै। (1:53)

6 यहरतऔर िै;

वहअधें उतरतऔर उससिलतै।

7 यहिधन करतऔर धनबनै,

वहकरतऔर करतै। (1:52)

8 वह ि ें उठा;

और दरिें िखड़ा करतै,

ि उनकअधिपतिों ,

और महििंसन अधिबन

ोंि खमयहैं,

और उसनउन पर जगत धरै।

9 "वह अपनभकों ाँों समरहा,

परनिें पचपड़े रहेंे;

ोंि मनअपनबल रण रबल ा।

10 यहझगडैं चकनोंे;

वह उनकिआकें गरजा।

यहतक करा;

और अपनबल 2:10 अपनबल ा: यह एक अतयधिअसरण िसमें परमवर मसऔर महिपषएवििभवियदै। ,

और अपनअभििींकरा।" (1:69)

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