एली के पुत्र
12 एली के पुत्र तो लुच्चे थे2:12 एली के पुत्र तो लुच्चे थे: मूसा प्रदत्त विधान में स्पष्ट व्यक्त था कि प्रत्येक मेलबलि में पुरोहित का भाग क्या और कितना है और उसमें चर्बी जलाने के भी स्पष्ट निर्देश थे। अत: विधान में निर्विष्ट अंश से अधिक लेना होप्नी और पीनहास के लिये अवज्ञा और निरंकुश व्यवहार था। ; उन्होंने यहोवा को न पहचाना। 13 याजकों की रीति लोगों के साथ यह थी, कि जब कोई मनुष्य मेलबलि चढ़ाता था तब याजक का सेवक माँस पकाने के समय एक नोकवाला काँटा हाथ में लिये हुए आकर, 14 उसे कड़ाही, या हाण्डी, या हँडे, या तसले के भीतर डालता था; और जितना माँस काँटे में लग जाता था उतना याजक आप ले लेता था। ऐसा ही वे शीलो में सारे इस्राएलियों से किया करते थे जो वहाँ आते थे। 15 और चर्बी जलाने से पहले भी याजक का सेवक आकर मेलबलि चढ़ानेवाले से कहता था, "भूनने के लिये याजक को माँस दे; वह तुझ से पका हुआ नहीं, कच्चा ही माँस लेगा।" 16 और जब कोई उससे कहता, "निश्चय चर्बी अभी जलाई जाएगी, तब जितना तेरा जी चाहे उतना ले लेना," तब वह कहता था, "नहीं, अभी दे; नहीं तो मैं छीन लूँगा।" 17 इसलिए उन जवानों का पाप यहोवा की दृष्टि में बहुत भारी हुआ; क्योंकि वे मनुष्य यहोवा की भेंट का तिरस्कार करते थे।