वचन के सिखानेवाले प्राचीनों का सम्मान
17 जो प्राचीन अच्छा प्रबन्ध करते हैं, विशेष करके वे जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं, दो गुने आदर के योग्य समझे जाएँ। 18 क्योंकि पवित्रशास्त्र कहता है, "दाँवनेवाले बैल का मुँह न बाँधना," क्योंकि "मजदूर अपनी मजदूरी का हकदार है।" (लैव्य. 19:13, व्यव. 25:4)