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1 Tessalonicenses 2

आचरण

1 इयों, आप नति हमआनयर2 वरनआप नतो, ि पहलििें ुःउठऔर उपदरव सहनपर हमपरमवर हमें ऐसहस िा, ि हम परमवर समिों ें ँ। 3 ोंि हमउपदरम और अशधते, और छल ै। 4 पर परमवर हमें ठहरकर समौंा, हम वरणन करतैं; और इसमें मनों नहीं2:4 मनुष्यों को नहीं: पौलुस को लोगों की चापलूसी करने और उनकी वाहवाही जीतने के लिए इस प्रकार की शिक्षा देने का लक्ष्य नहीं था। , परनपरमवर ो, हममनों ाँचतै, रसनकरतैं। (ु. 1:3, इफि. 6:6) 5 ोंि नतो, ि हम कभपलें िकरते, और िबहकरते, परमवर गवै। 6 और यदयपि हम मसिरण पर सकते, िहम मनों आदर नहीं हते, और े, और िे। 7 परनितरह अपनलकों लन-पषण करतै, हमनें रहकर मलतिै। 8 और हम लसकरत, वल परमवर सम, पर अपना-अपनें े, इसलिि हमगए े।

9 ोंि, इयों, हमपरिरम और कषमरण रखतो, ि हमनइसलििधनकरतें परमवर समरचिा, ि ें िपर ों। 10 आप गवो, और परमवर गवै, ि ििों ें हमयवहपविऔर िऔर िरहा। 11 नतो, ि िअपनलकों बरकरतै, हम ें हर एक उपदऔर िकरतऔर समझे। 12 ि ल-चलन परमवर ो, ें अपनऔर महिें ै।

िसलिों ों तरण

13 इसलिहम परमवर धनयविरनतर करतैं; ि जब हमपरमवर समवचन पहुँा, उसमनों नहीं, परनपरमवर वचन समझकर (और सचमयह ऐसै) रहण िऔर वह ें िरखतो, करतै। 14 इसलिि , इयों, परमवर उन कलिसमचलनलगे, यहिें मसें ैं, ोंि अपनों ुःा, उनोंयहिों ा। 15 िोंरभऔर भवियदवकऔर हमकसता, और परमवर उनसरसननहीं2:15 परमेश्वर उनसे प्रसन्न नहीं: उनका आचरण परमेश्वर को प्रसन्न करने के जैसा नहीं था, परन्तु उनके क्रोध को भड़काने के जैसा था।; और सब मनों िकरतैं। 16 और अनयजिों उनकउदिें करनहमें कतैं, ि सदअपनों घड़ा भरतरहें; पर उन पर भयनक रकपहुँै।

कलििलनअभि

17 इयों, जब हम ़ी िमन ें नहीं वरनरगट ें अलग गए े, हमनबड़ी लसुँखनिऔर अधियतिा। 18 इसलिहमन(अरे) एक नहीं, वरनआना, परनहमें रहा। 19 हमआशा, आननबड़ाै? हमरभमससमउसकआनसमय, े? 20 हमबड़ाऔर आननो।

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