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2 Coríntios 6

4 परनहर ें परमवर वकों समअपनसदों रगट करतैं, बड़े े, ों े, दरिरते, कटों े, 5 ़े े, े, लड़ों े, परिरम े, गतरहने, उपवकरने, 6 पविरते, े, रज े, े, पविआते। 7 सचे, सतवचन े, परमवर मरे; िकतहथिों िे, ैं, 8 आदर और िदर े, और े, यदयपि भरमों ैं सचैं। 9 अनजों सदैं; रसिैं; मरतसमैं और िैं; ों सदैं परननहीं े। (1 ि. 4:9, भज. 118:18) 10 करनों समैं, परनसरवदआननकरतैं, ों समैं, परनबहों धनवबनैं6:10 बहुतों को धनवान बना देते हैं: उन्होंने जिनके लिए वे सेवा किया करते थे वे उस खजाने के भागी बन गये जहाँ पर कीड़े नहीं होते हैं, और जहाँ चोर नहीं तोड़ते और न ही चोरी करते हैं।; ऐसैं हमनहीं िसब रखतैं।

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