हिजकिय्याह का मृत्यु से बचना
1 उन दिनों में हिजकिय्याह ऐसा रोगी हुआ कि मरने पर था, और आमोस के पुत्र यशायाह भविष्यद्वक्ता ने उसके पास जाकर कहा, "यहोवा यह कहता है, कि अपने घराने के विषय जो आज्ञा देनी हो वह दे; क्योंकि तू नहीं बचेगा, मर जाएगा।" 2 तब उसने दीवार की ओर मुँह फेर20:2 तब उसने दीवार की ओर मुँह फेर: क्योंकि वह भक्ति में बाधा रहित प्रार्थना करना चाहता था। , यहोवा से प्रार्थना करके कहा, "हे यहोवा! 3 मैं विनती करता हूँ, स्मरण कर20:3 स्मरण कर: पुरानी वाचा में धर्मी जन के लिए समृद्धि और दीर्घायु की प्रतिज्ञा थी। अपनी विश्वासयोग्यता एवं निष्ठा से अभिक्ष हिजकिय्याह सविनय प्रेरित होने का प्रयास करता है।, कि मैं सच्चाई और खरे मन से अपने को तेरे सम्मुख जानकर चलता आया हूँ; और जो तुझे अच्छा लगता है वही मैं करता आया हूँ।" तब हिजकिय्याह फूट फूटकर रोया। 4 तब ऐसा हुआ कि यशायाह आँगन के बीच तक जाने भी न पाया था कि यहोवा का यह वचन उसके पास पहुँचा, 5 "लौटकर मेरी प्रजा के प्रधान हिजकिय्याह से कह, कि तेरे मूलपुरुष दाऊद का परमेश्वर यहोवा यह कहता है, कि मैंने तेरी प्रार्थना सुनी और तेरे आँसू देखे हैं; देख, मैं तुझे चंगा करता हूँ; परसों तू यहोवा के भवन में जा सकेगा।