15 भोर को परमेश्वर के भक्त का टहलुआ उठा और निकलकर क्या देखता है कि घोड़ों और रथों समेत एक दल नगर को घेरे हुए पड़ा है। तब उसके सेवक ने उससे कहा, "हाय! मेरे स्वामी, हम क्या करें?" 16 उसने कहा, "मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं6:16 जो हमारी ओर हैं: एलीशा ने परमेश्वर के सब भक्तों के अंगीकार के वचन कहे, जब संसार उन्हें सताता था। वे जानते हैं कि परमेश्वर उनकी ओर है, उन्हें भयभीत नहीं होना है कि मनुष्य उनका क्या बिगाड़ सकता है। , वह उनसे अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं।" 17 तब एलीशा ने यह प्रार्थना की, "हे यहोवा, इसकी आँखें खोल दे6:17 हे यहोवा, इसकी आँखें खोल दे: एलीशा के सेवक में उसके स्वामी के प्रति विश्वास की कमी थी। अत: एलीशा प्रार्थना करता है कि उसे आत्मिक संसार का दर्शन हो। कि यह देख सके।" तब यहोवा ने सेवक की आँखें खोल दीं, और जब वह देख सका, तब क्या देखा, कि एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ है।
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