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प्रकाशितवाक्य 14:1-5

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

मेम्ना और 1,44,000 लोग

1 फिर मैंने दृष्टि की, और देखो, वह मेम्ना सिय्योन पहाड़ पर खड़ा है, और उसके साथ एक लाख चौवालीस हजार जन हैं, जिनके माथे पर उसका और उसके पिता का नाम लिखा हुआ है। 2 और स्वर्ग से मुझे एक ऐसा शब्द सुनाई दिया, जो जल की बहुत धाराओं और बड़े गर्जन के जैसा शब्द था14:2 जल की बहुत .... गर्जन के जैसा शब्द था: सागर या एक शक्तिशाली जल-प्रताप के तुल्य। अर्थात्, वह इतना तीव्र था कि स्वर्ग से पृथ्वी पर सुना जा सकता था।, और जो शब्द मैंने सुना वह ऐसा था, मानो वीणा बजानेवाले वीणा बजाते हों। (यहे. 43:2) 3 और वे सिंहासन के सामने और चारों प्राणियों और प्राचीनों के सामने मानो, एक नया गीत गा रहे थे, और उन एक लाख चौवालीस हजार जनों को छोड़, जो पृथ्वी पर से मोल लिए गए थे, कोई वह गीत न सीख सकता था। 4 ये वे हैं, जो स्त्रियों के साथ अशुद्ध नहीं हुए, पर कुँवारे हैं; ये वे ही हैं, कि जहाँ कहीं मेम्ना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं; ये तो परमेश्वर और मेम्ने के निमित्त पहले फल होने के लिये मनुष्यों में से मोल लिए गए हैं। 5 और उनके मुँह से कभी झूठ न निकला था, वे निर्दोष हैं।

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  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    1 तब मैंने देखा कि वह मेमना ज़ियोन पर्वत पर खड़ा है और उसके साथ 1,44,000 व्यक्ति भी हैं, जिनके मस्तक पर उसका तथा उसके पिता का नाम लिखा हुआ है. 2 तब मुझे स्वर्ग से एक शब्द सुनाई दिया, जो प्रचंड लहरों की आवाज के समान तथा जो बड़ी गर्जन-सी आवाज के समान था. यह शब्द, जो मैंने सुना, ऐसा था मानो अनेक वीणा बजानेवाले वीणा बजा रहे हों. 3 वे सिंहासन के सामने, चारों प्राणियों तथा पुरनियों के सामने एक नया गीत गा रहे थे. उन 1,44,000 व्यक्तियों के अलावा, जो सारी मानव जाति में से छुड़ाए गए थे, किसी भी अन्य में यह गीत सीखने की योग्यता ही न थी. 4 ये वे हैं, जो स्त्री-संगति से अशुद्ध नहीं हुए हैं क्योंकि इन्होंने स्वयं को स्त्री-संगति से अछूता रखा है. ये ही हैं वे, जो हमेशा मेमने के पीछे चलते हैं—चाहे मेमना कहीं भी जाए. इन्हें परमेश्वर तथा मेमने के लिए उपज के पहले फल के समान मनुष्यों में से छुड़ाया गया है. 5 झूठ इनके मुख से कभी न निकला—ये निष्कलंक हैं.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    1 फिर मैंने दृष्‍टि की, और देखो, वह मेमना सिय्योन पहाड़ पर खड़ा हुआ था और उसके साथ एक लाख चौवालीस हज़ार लोग थे, जिनके माथे पर उसका नाम और उसके पिता का नाम लिखा हुआ था। 2 फिर मैंने स्वर्ग में से बहुत सी जल-धाराओं और भयंकर गर्जन के समान एक आवाज़ सुनी; और मैंने जो आवाज़ सुनी वह ऐसी थी मानो वीणा बजानेवाले अपनी वीणाएँ बजा रहे हों। 3 वे सिंहासन, चारों प्राणियों और प्रवरों के सामने एक नया गीत गा रहे थे; परंतु उस गीत को उन एक लाख चौवालीस हज़ार लोगों को छोड़, जो पृथ्वी पर से छुड़ा लिए गए थे, कोई और नहीं सीख सकता था। 4 ये वे हैं जो स्‍त्रियों के साथ अशुद्ध नहीं हुए, और कुँवारे हैं। ये वे हैं, जो मेमने के पीछे-पीछे जहाँ कहीं वह जाता है चलते हैं। ये परमेश्‍वर और मेमने के लिए प्रथम फल के रूप में मनुष्यों में से छुड़ा लिए गए हैं। 5 इनके मुँह से कभी झूठ नहीं निकला था, वे14:5 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "परमेश्‍वर के सिंहासन के सामने" लिखा है। निर्दोष हैं।

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