नई सृष्टि
1 फिर मैंने नये आकाश और नई पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहला आकाश और पहली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। (यशा. 66:22) 2 फिर मैंने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हन के समान थी, जो अपने दुल्हे के लिये श्रृंगार किए हो। 3 फिर मैंने सिंहासन में से किसी को ऊँचे शब्द से यह कहते हुए सुना, "देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उनके साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उनके साथ रहेगा; और उनका परमेश्वर होगा। (लैव्य. 26:11,12, यहे. 37:27) 4 और वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा21:4 वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा: यह उस धन्य अवस्था की एक विशेषता है कि वहाँ एक भी आँसू न बहेगा।; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं।" (यशा. 25:8)
5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, "मैं सब कुछ नया कर देता हूँ21:5 मैं सब कुछ नया कर देता हूँ: पाप और मृत्यु के राज्य करने की जो अवस्था थी तब बदल जाएगी।।" फिर उसने कहा, "लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वासयोग्य और सत्य हैं।" (यशा. 42:9)