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प्रकाशितवाक्य 22:1-5

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

जीवन-जल की नदी

1 फिर उसने मुझे बिल्लौर के समान झलकती हुई, जीवन के जल की एक नदी22:1 जीवन के जल की एक नदी: इस वाक्यांश "जीवन के जल" का मतलब है रुके हुए पानी की तुलना में जीवित या बहता हुआ जल जैसा सोता या झरना। दिखाई, जो परमेश्वर और मेम्ने के सिंहासन से निकलकर, 2 उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी। नदी के इस पार और उस पार जीवन का पेड़ था; उसमें बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति-जाति के लोग चंगे होते थे। (यहे. 47:7) 3 फिर श्राप न होगा, और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उसकी सेवा करेंगे। (जक. 14:11) 4 वे उसका मुँह देखेंगे22:4 वे उसका मुँह देखेंगे: वे उसकी उपस्थिति में लगातार रहेंगे, और उन्हें उसकी महिमा के लगातार दर्शन की अनुमति मिल जाएगी।, और उसका नाम उनके माथों पर लिखा हुआ होगा। 5 और फिर रात न होगी, और उन्हें दीपक और सूर्य के उजियाले की आवश्यकता न होगी, क्योंकि प्रभु परमेश्वर उन्हें उजियाला देगा, और वे युगानुयुग राज्य करेंगे। (यशा. 60:19, दानि. 7:27)

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  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    1 इसके बाद उस स्वर्गदूत ने मुझे जीवन के जल की नदी दिखाई, जो स्फटिक के समान निर्मल-पारदर्शी थी, जो परमेश्वर तथा मेमने के सिंहासन से बहती थी. 2 यह नदी नगर के प्रधान मार्ग से होती हुई बह रही है. नदी के दोनों ओर जीवन के पेड़ है, जिसमें बारह प्रकार के फल उत्पन्‍न होते हैं. यह पेड़ हर महीने फल देता है. इस पेड़ की पत्तियों में राष्ट्रों को चंगा करने की क्षमता है. 3 अब से वहां श्रापित कुछ भी न रहेगा. परमेश्वर और मेमने का सिंहासन उस नगर में होगा, उनके दास उनकी आराधना करेंगे. 4 वे उनका चेहरा निहारेंगे तथा उनका ही नाम उनके माथे पर लिखा होगा. 5 वहां अब से रात होगी ही नहीं. न तो उन्हें दीपक के प्रकाश की ज़रूरत होगी और न ही सूर्य के प्रकाश की क्योंकि स्वयं प्रभु परमेश्वर उनका उजियाला होगे. वह हमेशा शासन करेंगे.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    1 तब स्वर्गदूत ने मुझे बिल्‍लौर के समान चमकती हुई जीवन के जल की22:1 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "स्वच्छ" लिखा है। नदी दिखाई, जो परमेश्‍वर और मेमने के सिंहासन से निकलती थी। 2 वह सड़क के बीचों-बीच बहती थी। नदी के इस ओर और उस ओर जीवन का वृक्ष था, जिसमें बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था, और उस वृक्ष की पत्तियों से जाति-जाति के लोग स्वस्थ होते थे। 3 अब से कोई शाप न रहेगा। उस नगर में परमेश्‍वर और मेमने का सिंहासन होगा, और उसके दास उसकी सेवा करेंगे। 4 वे उसके मुख को देखेंगे, और उसका नाम उनके माथों पर होगा। 5 फिर22:5 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "वहाँ" लिखा है। कभी रात न होगी और न ही उन्हें दीपक और सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होगी, क्योंकि प्रभु परमेश्‍वर उन्हें प्रकाश देगा और वे युगानुयुग राज्य करेंगे।

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