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Atos 17

िसलनगर ें और

1 िअमिि17:1 अम्फिपुलिस: यह मकिदुनिया के पूर्वी प्रांत की राजधानी थी। और अपिकर िसलें आए, जहाँ यहिों एक आरधनलय ा। 2 और अपनि अनउनकगया, और सबिपविरशों उनकद-वििा; 3 और उनकअरल-खलकर समझि मसुःउठा, और मरें उठना, अवशा; "यहिसकैं ें कथूँ, मसै।" 4 उनमें ितनों े, और भकिों ें बहों और बहरमिों िा, और और िगए5 परनयहिों ईरभरकर ों ें कई मनों अपनें िा, और लगकर नगर ें लडमचलगे, और घर पर चढ़ाकरकउनें ों मना। 6 और उनें कर, यह िऔर इयों नगर िों मनीं, "िोंजगत उलटलटकर िै, यहाँ आए ैं। 7 और उनें अपनयहाँ ठहरै, और सब सब यह कहतैं ि ै, और सर आजिकरतैं।" 8 जब और नगर िों ें ीं, परगये। 9 और उनोंऔर ों जमनत पर िा।

िनगर ें और

10 इयों रनऔर िें िा, और वहाँ पहुँचकर यहिों आरधनलय ें गए11 िसलयहिों भलऔर उनोंबड़ी लसवचन रहण िा, और रतििपविरशों ें ूँरहि ें ऐसैं ि नहीं। 12 इसलिउनमें बहों े, और िों ें और ों ें बहों ििा। 13 िजब िसलयहगए ि िें परमवर वचन ै, वहाँ आकर ों भडऔर हलचल मचलगे। 14 तब इयों रनििि समिचल; परनऔर िवहीं रह गए15 पहुँउसएथेंतक गए, और और िियह िकर िि अति आओ

एथेंनगर ें

16 जब एथेंें उनकरतकर रहा, नगर रतों भरखकर उसकजल उठा। 17 अतवह आरधनलय ें यहिों और भकों और ें िलते, उनसहर िद-वििकरता। 18 तब इपि17:18 इपिकूरी: दार्शनिकों के इस संप्रदाय ने इन्कार किया था कि संसार की सृष्टि परमेश्वर के द्वारा की गई है। और ईकशनिों ें उससतरकरनलगे, और कहा, "यह बकवकहनहतै?" परनसरों कहा, "वह अनवतरचरक पडै," ोंि वह और नरसमा। 19 तब उसअपनअरिपग17:19 अरियुपगुस: मार्जिन, या "मंगल ग्रह की पहाड़ी।" पर गए और ा, "हम सकतैं, ि यह नयमत ै, ै? 20 ोंि अनें हमें ै, इसलिहम ननहतैं ि इनकअरै?" 21 (इसलिि सब एथेंऔर परदवहाँ रहतनई-नई ें कहनऔर ननिऔर िें समय नहीं िे।)

अरिपगें उपद

22 तब अरिपगें खड़ा कर कहा, "एथेंों, ैं खतूँ ि हर ें वतबड़े ननो। 23 ोंि ैं िरतजनवसरहा, एक ऐस, िपर िा, अनजईशवर िे।’ इसलिििजतो, ैं ें उसकसमूँ। 24 िपरमवर और उसकसब वसबना, वह वरऔर कर बनमनिों ें नहीं रहता। (1 ा. 8:27, 2 इति. 6:18, भज. 146:6) 25 िवसआवशयकतरण मनों ों ै, ोंि वह आप सब वन और और सब ै। (यशा. 42:5, भज. 50:12, भज. 50:12) 26 उसनएक मनों सब िाँ पर रहनिबनैं; और उनकठहरसमय और िइसलिाँै, (यव. 32:8) 27 ि परमवर ूँ़े, और यद उसकपहुँसके, और तव ें, वह हम ें िनहीं ैं। (यशा. 55:6, ि. 23:23) 28 ोंि हम उसें िरहते, और चलतिरते, और िरहतैं; ितनकविों कहै, हम उसैं।’ 29 अतपरमवर कर हमें यह समझनउचिनहीं ि ईशवरत, ाँपतथर समै, मनगरऔर कलपनगढ़े गए ों। (उत. 1:27, यशा. 40:18-20, यशा. 44:10-17) 30 इसलिपरमवर अजनतसमयों पर नहीं िा, पर अब हर जगह सब मनों मन िआजै। 31 ोंि उसनएक िठहरै, िसमें वह उस मनिकतजगत करा, िउसनठहरऔर उसमरें िकर, यह सब पर रमिकर ै।" (भज. 9:8, भज. 72:2-4, भज. 96:13, भज. 98:9, यशा. 2:4)

32 मरनरनकर ितनउपहकरनलगे, और ितनों कहा, "यह हम िकभेंे।" 33 इस पर उनकें चलगया। 34 परनमनउसकिगए, और ििा; िनमें ििअरिपगसदसा, और दमरिमक एक ी, और उनकऔर ितने।

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