14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कमरबन्ध है बाँध लो। 15 और मसीह की शान्ति, जिसके लिये तुम एक देह होकर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कमरबन्ध है बाँध लो। 15 और मसीह की शान्ति, जिसके लिये तुम एक देह होकर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।