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Cânticos 1

1 ठगै। (1 ा. 4:32)

पहल

वध

2 अपनुँबनों े!

ोंि खमधउततम ै,

3 ाँि-ाँि इतों गनउततम ै,

उणइतै;

इसलििाँ रखतैं

4 ींे; हम ़ेंे।

अपनमहल ें आयै।

हम ें मगन और आननिोंे;

हम खमधअधिचरकरेंे;

रखतैं। (11:4, िि. 3:1-12, भज. 45:14)

5 यरशलिों,

ैं ूँ परनदर ूँ,

तम

और परों ूँ।

6 इसलिि ैं ाँवलूँ,

ोंि ैं लस गई

झसअपरसने,

उनोंिों रखविबना;

परनैंअपनि1:6 अपनिी: यह उसकऔर उसकदरतउपमै। रखवनहीं ी!

7 णपिबता,

अपऩ-बकरिाँ कहाँ चरै,

पहर उनें कहाँ ै;

ैं ों िों ़-बकरिों

ूँघट ़े भटकतिूँ?

ियतमचन

वर

8 िों ें दरी, यदि यह नत

़-बकरिों ों िों पर चल1:8 ़-बकरिों ों िों पर चल: अरयदि ियतम तव ें चरवउसचरवों ें परनयदि वह वह जसमहल ें एगा।

और चरों तम, अपनबकरिों बचों चरा।

9 िैंलन

़िरथों ें ़ी ै। (2 इति. 1:16)

10 ों लटों दर ैं,

और कणों लड़िों

वध

11 हम िाँलदआभषण बने।

12 जब अपन

जटगनरही।

13 िसम

िों ें पड़ी रहतै।

14 िेंहदों समै,

एनगदिों ें ै।

वर

15 दरै, ि, दरै;

ें कबतरैं।

वध

16 िदर और मनभवन

और हमिहरै;

17 हमघर धरन वदैं

और हमछत कड़िाँ सनवर ैं।

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