35 पृथ्वी के सब रहनेवाले उसके सामने तुच्छ गिने जाते हैं,
और वह स्वर्ग की सेना और पृथ्वी के रहनेवालों के बीच
अपनी इच्छा के अनुसार काम करता है;
और कोई उसको रोककर उससे नहीं कह सकता है, "तूने यह क्या किया है?"
35 पृथ्वी के सब रहनेवाले उसके सामने तुच्छ गिने जाते हैं,
और वह स्वर्ग की सेना और पृथ्वी के रहनेवालों के बीच
अपनी इच्छा के अनुसार काम करता है;
और कोई उसको रोककर उससे नहीं कह सकता है, "तूने यह क्या किया है?"
35 पृथ्वी के सारे लोगों का
कोई महत्व नहीं है.
वह जैसा चाहता है
वैसा स्वर्ग की शक्तियों
और पृथ्वी के लोगों के साथ करता है.
उसे कोई भी रोक नहीं सकता
या यह कह नहीं सकता: "आपने यह क्या कर डाला?"
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