18 इसलिए तुम मेरे ये वचन अपने-अपने मन और प्राण में धारण किए रहना, और चिन्ह के रूप में अपने हाथों पर बाँधना, और वे तुम्हारी आँखों के मध्य में टीके का काम दें। 19 और तुम घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते-उठते इनकी चर्चा करके अपने बच्चों को सिखाया करना। 20 और इन्हें अपने-अपने घर के चौखट के बाजुओं और अपने फाटकों के ऊपर लिखना; 21 इसलिए कि जिस देश के विषय में यहोवा ने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर कहा था, कि मैं उसे तुम्हें दूँगा, उसमें तुम और तुम्हारे बच्चे दीर्घायु हों11:21 इसलिए कि .... उसमें तुम और तुम्हारे बच्चे दीर्घायु हों: अत: इस्राएल के लिये कनान देश की प्रतिज्ञा सदाकालीन थी परन्तु शर्त आधारित भी थी।, और जब तक पृथ्वी के ऊपर का आकाश बना रहे तब तक वे भी बने रहें।
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