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Deuteronômio 28

आजििआश

1 "यदि अपनपरमवर यहसब आजँ, ैं आज ूँ, कसकरनिलगकर उसके, वह सब िों ें करा। 2 िअपनपरमवर यहननरण सब आशपर ोंे। 3 धननगर ें, धनें। 4 धनसन, और ि उपज, और और ़-बकरआदि पशबचे। (1:42) 5 धनकर28:5 करी: ों ें करयकिगत आवशयकतवसकर उठएक रमपरिधन ा। और आटूँधन6 धनतर आतसमय, और धनहर समय

7 "यहऐसकरि शतपर चढ़ाकरेंे; एक पर चढ़ाकरेंे, परनमनकर े। 8 खतों पर और ितनों ें लगएगउन सभपर यहआशा; इसलिपरमवर यहउसमें वह आशा। 9 यदि अपनपरमवर यहआजनतउसकों पर चले, वह अपनशपथ अनअपनपविरजकरकिरखा। 10 और श-दसब यह खकर, ि यहकहलै, डर े। 11 और ििषय यहवजों शपथ कर कहा, उसमें वह सनी, और ि उपज ी, और पशबढकरकभलकरा। 12 यहिअपनआकशरउततम भणलकर ि पर समय पर ेंबरसकरा, और ों पर आशा; और बहिों उधा, परनिउधपड़ेा। 13 और यहझकूँनहीं, ििठहरएगा, और नहीं, परनऊपर रहा; यदि परमवर यहआजैं आज झकूँ, उनकननें मन लगकर कसकरे; 14 और िवचनों ैं आज आजूँ उनमें िकर परवते, और उनककरे।

अनििअभि

15 "परनयदि अपनपरमवर यहे, और उसकआजऔर ििों लन करनें ैं आज ूँ कसनहीं करा, सब पर पड़ेंे। 16 िनगर ें, िें। 17 िकरऔर आटूँधन18 िसन, और ि उपज, और ों और ़-बकरिों बचे। 19 ितर आतसमय, और िहर समय

20 "ििस-जिें लग, उसमें यहतब तक झका, और भयकरता, और धमकरहा, जब तक ि, और नष; यह इस रण ि यहकर करा। 21 और यहऐसकरि मरें लकर उस समय तक लगरही, जब तक िि अधििरहउस पर अन22 यहझकषयरे, और वर, और , और बड़ी जलन े, और तलव, और लस, और ा; और उस समय तक िरहेंे, जब तक सत23 और िऊपर आकतल ा, और ाँतलि एगी। 24 यहें बदलऔर ि बरसएगा; वह आकपर यहाँ तक बरसि सतएगा।

25 "यहझकशतहरवएगा; और एक उनकमनकरनएगा, परनकर उनकमनएगा; और सब ों ें ा-िा। 26 और शव आकाँि-ाँि पकिों, और धरतपशआहा; और उनकभगा। 27 यहझकि़े, और बव, और , और जलऐस़िकरा, ि सका। 28 यहगल और कर ा, और मन अतयनघबरा; 29 और िें टटलतिपहरें टटलतिा, और म-कसफल ोंे; और सदवल अतसहतऔर टतरहा, और ़ाा। 30 लगएगा, परनसरउसकरषकरा; घर बनएगा, परनउसमें बसनएगा; लगएगा, परनउसकफल एगा। 31 ों मनएगा, और उसकाँएगा; गदहमनें चलएगा, और ििा; ़-बकरिाँ शतलग ी, और ओर उनक़ाा। 32 े-िाँ सरों लग े, और उनकिखते-खतें रह ी; और बस चला। 33 ि उपज और कमएक अनजे; और सरवदवल अतसहतऔर िसतरहा; 34 यहाँ तक ि उन ों रण अपनों गल एगा। 35 यहटनों और ाँों ें, वरननख तक अस़े िलकर झक़िकरा। (रका. 16:2)

36 "यहझकउस सम, िसकअपनऊपर ठहरएगा, और वजों िअनजएक ि पहुँएगा; और उसकमधें रहकर और पतथर सरवतउपसनऔर करा। 37 और उन सब िों ें िनकमधें यहझकपहुँएगा, वहाँ ों िचकिा, और और रण समझएगा। 38 ें बहएगा, परनउपज ़ी बटा; ोंि ििाँ उसी। 39 िाँ लगकर उनमें करा, परनउनकमधएगा, वरनफल एगा; ोंि ़े उनके। 40 ें ोंे, परनउनकअपनशरें लगएगा; ोंि झडे। 41 े-िाँ उतपनोंे, परनरहेंनहीं; ोंि बनें चले। 42 सब और ि उपज ििाँ ी। 43 परदमधें रहवह बढएगा; और आप घटतचलएगा।

44 "वह झकउधा, परनउसकउधसका; वह िऔर ूँठहरा। 45 अपनपरमवर यहआजऔर ििों ननउसका, इस रण सब पर पड़ेंे, और पड़े रहेंे, और झकपकड़ेंे, और अनें नषएगा। 46 और पर और पर सदिबनरहकर िऔर चमतठहरेंे;

47 "सब पदबहयत पर आननऔर रसननतअपनपरमवर यहनहीं करा, 48 इस रण झका, ा, ा, और सब पदों रहिकर अपनउन शतकरनपड़ेिें यहिा; और जब तक नषतब तक वह गरदन पर रखा। 49 यहिे, वरनउडउकएक ि चढ़ा एगिसकसमझा; 50 उस ि ों यवहा, ़ों ुँखकर आदर करेंे, और लकों पर दयकरेंे; 51 और पशबचऔर ि उपज यहाँ तक ि नषएगा; और िअन, और नयखमधु, और टटक, और बछड़े, ़ेंे, यहाँ तक ि एगा। 52 और परमवर यहिसब टकों तर रखेंे; सब टकों तर उस समय तक ेंे, जब तक ें ी-और शहरपनें िपर भरकरिँ। 53 तब िऔर उस कट समय िसमें शतझकेंे, अपनिजने-िों ाँिें परमवर यहझकएगा। 54 और ें मल और अति वह अपन, और अपनणपि, और अपनबचलकों ि ा; 55 और वह उनमें िअपनलकों ाँें वह आप एगा, ोंि िऔर उस कट ें, िसमें शतटकों तर ेंे, उसकरहा। 56 और ें यहाँ तक मल और ि रपन और मलति पर ाँधरतडरतो, वह अपनणपिपति, और े, और ो, 57 अपनी, वरनअपनजनबचों ि ी, ोंि िऔर उस कट समय िसमें शतटकों तर रकर रखेंे, वह सब वसघटउनें िपकएगी।

58 "यदि इन यवसवचनों लन करनें, इस तक ें िैं, कसकरकउस आदरणऔर भयया, यहपरमवर भय े, 59 यहझकऔर भयनक-भयनक दणा, और बहिरहनऔर ी-दणोंे। 60 और वह िउन सब ों िऊपर लगा, िनसभय ा; और ें लगरहेंे। 61 और ितनआदि दणइस यवसतक ें नहीं िैं, उन सभयहझकयहाँ तक लगा, ि सतएगा। 62 और अपनपरमवर यहा, इस रण आकों समअनगिनत बदलें ़े मनरह े। 63 और अब यहभलऔर बढकरनहरै, तब उसकवरनसतकरनहरा; और िि अधिरहउस पर उख़े ओगे। 64 और यहझकइस कर उस तक सब ों ों ें ितर-बितर करा; और वहाँ रहकर अपनऔर अपनरखअनजऔर पतथर सरवतउपसनकरा। 65 और उन िों ें कभएगा, और ाँििा; ोंि वहाँ यहऐसकरि दय ाँपतरहा, और ें ुँधलपडी, और मन रहा; 66 और झकवन िसनरहा; और िन-रथरथररहा, और वन भररहा। 67 मन ें भय बनरहा, और ों िखतरहा, उसकरण आह रकर कहा, ाँकब ी!’ और ाँआह रकर कहा, कब ा!’ 68 और यहझकों पर चढ़ाकर िें उस ा, िसकिषय ें ैंकहा, ि वह िखनें आएगा; और वहाँ अपनशतस-दििरहे, परनहक 28:68 हक ा: उनें बनिनहीं करा। यह चकर ि परमवर िैं और हर एक ें ैं। "

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