10 "उसने उसको जंगल में,
और सुनसान और गरजनेवालों से भरी हुई मरूभूमि में पाया;
उसने उसके चारों ओर रहकर उसकी रक्षा की,
और अपनी आँख की पुतली के समान उसकी सुधि रखी।
11 जैसे उकाब अपने घोंसले को हिला-हिलाकर
अपने बच्चों के ऊपर-ऊपर मण्डराता है,
वैसे ही उसने अपने पंख फैलाकर उसको अपने परों पर उठा लिया।