हर बात का अपना समय
1 हर एक बात3:1 हर एक बात: मनुष्यों के काम और उनके साथ होनेवाली घटनाएँ। का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है।
2 जन्म का समय, और मरण का भी समय;
बोने का समय; और बोए हुए को उखाड़ने का भी समय है;
3 घात करने का समय, और चंगा करने का भी समय;
ढा देने का समय, और बनाने का भी समय है;
4 रोने का समय, और हँसने का भी समय;
छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है;
5 पत्थर फेंकने का समय, और पत्थर बटोरने का भी समय;
गले लगाने का समय, और गले लगाने से रुकने का भी समय है;
6 ढूँढ़ने का समय, और खो देने का भी समय;
बचा रखने का समय, और फेंक देने का भी समय है;
7 फाड़ने का समय, और सीने का भी समय;
चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है;
8 प्रेम करने का समय, और बैर करने का भी समय;
लड़ाई का समय, और मेल का भी समय है।