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इफिसियों 4:26,27,29,31,32

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो; सूर्य अस्त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। (भज. 4:4) 27 और न शैतान को अवसर दो4:27 और न शैतान को अवसर दो: शैतान के सुझावों और लालचों को मत मानो, जो निर्दयी और गुस्से की भावनाओं को संजोने के लिए हर एक मौके का इस्तेमाल करेगा।। 29 कोई गंदी बात तुम्हारे मुँह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही निकले जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उससे सुननेवालों पर अनुग्रह हो। 31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्दा सब बैर-भाव समेत तुम से दूर की जाए। 32 एक दूसरे पर कृपालु, और करुणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

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  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    26 "यदि तुम क्रोधित होते भी हो, तो भी पाप न करो."4:26 स्तोत्र 4:4 सूर्यास्त तक तुम्हारे क्रोध का अंत हो जाए, 27 शैतान को कोई अवसर न दो.

    29 तुम्हारे मुख से कोई भद्दे शब्द नहीं परंतु ऐसा वचन निकले, जो अवसर के अनुकूल, अन्यों के लिए अनुग्रह का कारण तथा सुननेवालों के लिए भला हो. 31 सब प्रकार की कड़वाहट, रोष, क्रोध, झगड़ा, निंदा, आक्रोश तथा बैरभाव को स्वयं से अलग कर दो. 32 एक दूसरे के प्रति कृपालु तथा सहृदय बने रहो, तथा एक दूसरे को उसी प्रकार क्षमा करो, जिस प्रकार परमेश्वर ने मसीह में तुम्हें क्षमा किया है.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    26 क्रोध तो करो पर पाप मत करो;4:26 भजन 4:4 सूर्यास्त होने तक तुम्हारा क्रोध बना न रहे, 27 और न शैतान को अवसर दो। 29 कोई अपशब्द तुम्हारे मुँह से न निकले, बल्कि वही निकले जो आवश्यकता के अनुसार दूसरों की उन्‍नति के लिए उत्तम हो, ताकि सुननेवालों पर अनुग्रह हो। 31 सारी बुराई के साथ सब प्रकार की कड़वाहट, और रोष, और क्रोध, और कलह, और निंदा तुमसे दूर किए जाएँ। 32 एक दूसरे के प्रति कृपालु और दयालु बनो, और जैसे परमेश्‍वर ने मसीह में तुम्हें क्षमा किया है, वैसे तुम भी एक दूसरे को क्षमा करो।

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