19 और आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने-अपने मन में प्रभु के सामने गाते और स्तुति करते रहो। (कुलु. 3:16, 1 कुरि. 14:26) 20 और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो। 21 और मसीह के भय से एक दूसरे के अधीन रहो5:21 एक दूसरे के अधीन रहो: जीवन के विभिन्न सम्बंधों में अधीनता को बनाए रखें।।