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फिलिप्पियों 1:12-14,20,21

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

कैदी के रूप में सेवा

12 हे भाइयों, मैं चाहता हूँ, कि तुम यह जान लो कि मुझ पर जो बीता है, उससे सुसमाचार ही की उन्नति हुई है। (2 तीमु. 2:9) 13 यहाँ तक कि कैसर के राजभवन की सारे सैन्य-दल और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूँ, 14 और प्रभु में जो भाई हैं, उनमें से अधिकांश मेरे कैद होने के कारण, साहस बाँधकर, परमेश्वर का वचन बेधड़क सुनाने का और भी साहस करते हैं।

जीवित रहना मसीह है

20 मैं तो यही हार्दिक लालसा और आशा रखता हूँ कि मैं किसी बात में लज्जित न होऊँ, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूँ या मर जाऊँ। 21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है: ये उसके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था जिसके निमित्त उसने स्वयं को एकनिष्ठा में समर्पित कर दिया था।, और मर जाना लाभ है।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    12 प्रिय भाई बहनो, अब मैं तुम्हें बताना चाहता हूं कि मुझसे संबंधित हर एक परिस्थिति के कारण ईश्वरीय सुसमाचार के प्रचार में प्रगति ही हुई है. 13 परिणामस्वरूप कारागार के पहरेदार और अन्य सभी यह जान गए हैं कि मैं मसीह के लिए बंदी हूं. 14 मेरे बंदी होने के कारण प्रभु में अधिकांश साथी भाई बहन परमेश्वर का वचन साहस, तत्परता तथा निडरतापूर्वक सुनाने के लिए पहले से कहीं अधिक उत्साही हो गए हैं.

    20 मेरी हार्दिक इच्छा और आशा यह है कि मैं किसी भी परिस्थिति में लज्जित न होऊं, परंतु हमेशा की तरह अब भी निडरता में मेरे शरीर से, चाहे जीवित अवस्था में या मृत अवस्था में, मसीह की महिमा होती रहें. 21 इसलिये कि मेरे लिए जीवित रहना मसीह है और मृत्यु लाभ है.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    12 अब हे भाइयो, मैं चाहता हूँ कि तुम यह जान लो कि जो कुछ मुझ पर बीता है उससे सुसमाचार की और भी प्रगति हुई है, 13 जिससे राजभवन के सारे पहरेदारों और बाकी सब लोगों पर यह प्रकट हुआ है कि मैं मसीह के लिए कैद में हूँ, 14 और मेरे कैद होने के कारण अधिकांश भाई प्रभु पर भरोसा रखकर और भी अधिक साहस और निडरता के साथ वचन सुनाते हैं।

    20 मेरी हार्दिक इच्छा और आशा यही है कि मैं किसी भी बात में लज्‍जित न होऊँ बल्कि जैसे मसीह की महिमा मेरी देह से पूरे साहस के साथ सदा होती रही है वैसे ही अब भी हो, चाहे मैं जीवित रहूँ या मर जाऊँ।

    21 मेरे लिए तो जीवित रहना मसीह, और मर जाना लाभ है।

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