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Filipenses 1

अभिदन

1 मसऔर िओर सब पविों , मसें कर ििें रहतैं, अधयकों और वकों सम,

2 हमिपरमवर और रभमसओर ें अनरह और ि िलतरहे।

धनयवऔर कलििथन

3 ैं जब जब ें मरण करतूँ, तब-तब अपनपरमवर धनयवकरतूँ, 4 और जब कभसब ििनतकरतूँ, सदआननिनतकरतूँ 5 इसलिि पहलिकर आज तक समें सहभरहो। 6 इस भर1:6 मुझे इस बात का भरोसा है: इसका मतलब यह है पौलुस ने जो कुछ कहा उसका सच पूरी तरह से आश्वस्त था। ि िसनें अचआरमिै, वहउसमसितक करा। 7 उचिि ैं सब िऐसिकरूँ, ोंि मन ें बसो, और ें और समिउततर और रमें सब अनरह ें सहभो। 8 इसमें परमवर गवि ैं मससमकरकसब लसकरतूँ। 9 और ैं यह थनकरतूँ, ि , और सब रकिसहिऔर बढ, 10 यहाँ तक ि उततम उततम ों ि1:10 उत्तम बातों को प्रिय जानो: सही और गलत क्या था, अच्छाई और बुराई क्या थी, इसकी समझ होना।, और मसितक सचबनरहो, और कर ; 11 और उस िकतफल मसैं, भरपिससपरमवर महिऔर ि रहे। (यशा. 15:8)

ें

12 इयों, ैं हतूँ, ि यह ि पर ै, उसससमउननति ै। (2 ु. 2:9) 13 यहाँ तक ि सर जभवन य-दल और सब ों ें यह रगट गयि ैं मसिूँ, 14 और रभें ैं, उनमें अधिांरण, हस ाँधकर, परमवर वचन धडऔर हस करतैं। 15 और झगड़े रण मसरचकरतैं और भलमनसे। (िि. 2:3) 16 कई एक यह नकर ि ैं समिउततर ठहरगयूँ रचकरतैं। 17 और कई एक िनहीं पर िमसकथैं, यह समझकर ि ें िउतपनकरें। 18 ? वल यह, ि हर रकबहे, सचे, मसकथै, और ैं इससआननिूँ, और आननिरहूँी।

19 ोंि ैं नतूँ ि िनता, और मसआत1:19 यीशु मसीह की आत्मा: वह आत्मा जो यीशु मसीह में था कि उसे परीक्षाओं का धीरज पूर्वक सामना करने के योग्य बनाए। ा, इसकरतिफल, उदा। (. 8:28)

िरहनमस

20 ैं यहिलसऔर आशरखतूँ ि ैं िें लजिँ, पर रबल हस रण मसबड़ासदरहै, अब ैं िरहूँ मर ँ। 21 ोंि ििरहनमस1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है: ये उसके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था जिसके निमित्त उसने स्वयं को एकनिष्ठा में समर्पित कर दिया था।, और मर ै। 22 पर यदि शरें िरहनिभदयक ैं नहीं नति िसकूँ। 23 ोंि ैं ों असमजस ें ूँ; हति ह-तमसरहूँ, ोंि यह बहअचै, 24 परनशरें रहनरण और आवशयक ै। 25 और इसलिि इसकभरै। अतैं नतूँ ि ैं िरहूँा, वरनसब रहूँा, िससिें और उसमें आननिरहो; 26 और घमणिषय ें करतो, वह िआनमसें अधिबढ

रयऔर मसिुःउठ

27 वल इतनकरि ल-चलन मससमि ैं आकर ें ूँ, आऊँ, िषय ें यह ूँ ि एक आतें िो, और एक िकर समििपरिरम करतरहतो। 28 और िें ििों भय नहीं े। यह उनकििपषिै, परनिउदा, और यह परमवर ओर ै। 29 ोंि मसरण पर यह अनरह ि वल उस पर िकरपर उसकिुःउठ, 30 और ें परिरम करनै, करतै, और अब नति ैं करतूँ।

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