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Hebreus 11

ियक

1 अब िआशवसिचय, और अनदवसरमै। 2 ोंि इसिषय ें वजों अचगवगई3 िहम ैं, ि ि रचनपरमवर वचन ै। यह नहीं, ि खनें आतै, वह वसबनो। (उत. 1:1, . 1:3, भज. 33:6-9)

4 ििउततम बलिपरमवर िचढ़ाा; और उसउसकधरगवगई: ोंि परमवर उसकेंों िषय ें गवी; और उसवह मरनपर अब तक ें करतै। (उत. 4:3-5) 5 िहनउठिगया, ि े, और उसकपतनहीं िा; ोंि परमवर उसउठिा, और उसकउठपहलउसकयह गवगई ी, ि उसनपरमवर रसनिै। (उत. 5:21-24) 6 और ििउसरसनकरनअनह11:6 विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है: वह मनुष्य के साथ प्रसन्न नहीं हो सकता जिसे उसमें भरोसा नहीं हैं, जो उसकी घोषणाओं और प्रतिज्ञाओं की सच्चाई पर सन्देह करता हैं।, ोंि परमवर आनिकरनि, ि वह ै; और अपनजनों रतिफल ै। 7 िउन ों िषय ें उस समय िपडीं, वनकर भकि अपनघरबचिजहबना, और उसकउसनठहरा; और उस िकति, िै। (उत. 6:13-22, उत. 7:1)

8 िअबहम जब गयआजनकर ऐसजगह िकल गयििसत ें ा, और यह नता, ि ैं िधर ूँ; िकल गया। (उत. 12:1) 9 िउसनरतििें परें परदरहकर इसहऔर समउसकउसरतििे, तमें िा। (उत. 26:3, उत. 35:12, उत. 35:27) 10 ोंि वह उस िींनगर रतकरता, िसकरचनऔर बनपरमवर ै। 11 िआप ़ी पर गररण करनमर; ोंि उसनरतिकरनसचा। (उत. 17:19, उत. 18:11-14, उत. 21:2) 12 इस रण एक जन मरा, आकों और समतट सम, अनगिनत उतपन(उत. 15:5, उत. 2:12)

13 सब िदशें मरे; और उनोंरतिवसनहीं ं; पर उनें खकर आननिऔर िा, ि हम पर परदऔर हरैं। (उत. 23:4, 1 इति. 29:15) 14 ऐसी-ऐसें कहतैं, रगट करतैं, ि वदें ैं। 15 और ििकल आए े, यदि उसकि करतउनें अवसर ा। 16 पर एक उततम अरवरअभिैं, इसलिपरमवर उनकपरमवर कहलें नहीं लजा, ोंि उसनउनकिएक नगर िै। (ि. 3:6, ि. 3:15)

17 िअबहम े, परखसमय ें, इसहबलिचढ़ाा, और िसनरतिसच ा। (उत. 22:1-10) 18 और िससयह कहगया, "इसहकहलएगा," वह अपनएकलचढ़ालगा। (उत. 21:12) 19 ोंि उसनिा, ि परमवर मरै, ि उसमरें ि, इस रकउनीं ें ि पर वह उसििा। 20 िइसहऔर एसआनों िषय ें आशी। (उत. 27:27-40) 21 िमरतसमय ों ों ें एक-एक आशी, और अपनिपर सहकर दणडवतिा। (उत. 47:31, उत. 48:15,16) 22 िे, जब वह मरनपर ा, इसएल सनिकल चरी, और अपनहडिों िषय ें आजी। (उत. 50:24,25, ि. 13:19)

23 ििउसको, उतपनमहतक िरखा; ोंि उनोंा, ि लक दर ै, और आजडरे। (ि. 1:22, ि. 2:2) 24 िसयकर ़िकहलइनिा। (ि. 2:11) 25 इसलिि उसें ़े िगनपरमवर ों ुःगनऔर उततम लगा। 26 और मसरण11:26 मसीह के कारण: इसका मतलब यह है कि या तो वह अपने विश्वास के लिए निन्दा सहने को तैयार था कि मसीह आएगा। िििभणबड़ा धन समझोंि उसकें फल ओर लगीं। (1 पत. 4:14, मत5:12) 27 िडरकर उसनििा, ोंि वह अनदखतरहा। (ि. 2:15, ि. 10:28,29) 28 िउसनफसह और लहिकनिि ी, ि पहिों करनइसएलिों पर े। (ि. 12:21-29)

29 िसमऐसउतर गए, ि पर े; और जब ििों करना, सब मरे। (ि. 14:21-31) 30 ियरशहरपन, जब ितक उसकचककर लगवह िपड़ी। (भज. 106:9-11, यहो. 6:12-21) 31 िआजननों नहीं ; इसलिि उसनिों शल रखा। (ू. 2:25, यहो. 2:11,12, यहो. 6:21-25)

32 अब और कहूँ? ोंि समय नहीं रहा, ि िा, और और िमशा, और िफतह ा, और ऊद और शमएल ा, और भवियदवकवरणन करूँ। 33 इनोंिे; िकति; रतिवसीं, िंों ुँबनि, 34 आग िा; तलवबच िकले, िबलतें बलवन; लड़ाें िकले; ििों ों भगा। 35 िों अपनमरििा; ितने-मर गए; और टका; इसलिि उततम नरों। 36 सरउपहें उड़ाे; और ़े े; वरनाँे; और ें पडपरखगए37 पथरिगए; आरगए; उनकपरगई; तलवगए; ें और ें और ुःगत़ों और बकरिों ें ओढ़े , इधर-उधर े-िे। 38 और गलों, और पह़ों, और ें, और दरों ें भटकतिे। उनका।

39 िइन सब िषय ें अचगवगई, उनें रतिवसिी। 40 ोंि परमवर हमिपहलएक उततम ठहर11:40 परमेश्वर ने हमारे लिये पहले से एक उत्तम बात ठहराई: कुछ उत्तम बात देने के लिये पहले से ही निर्धारित की हैं अर्थात्, परमेश्वर ने उन्हें जिसका उन्हें किसी को एहसास नहीं था।, ि हमििधतपहुँें।

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