ग्रहणयोग्य सेवा
1 भाईचारे का प्रेम बना रहे। 2 अतिथि-सत्कार करना न भूलना, क्योंकि इसके द्वारा कितनों ने अनजाने में स्वर्गदूतों का आदर-सत्कार किया है। (1 पत. 4:9) 3 कैदियों की ऐसी सुधि लो13:3 कैदियों की ऐसी सुधि लो: वह सभी जो बन्दी हैं, चाहे युद्ध के कैदी, जो जाँच के लिये हिरासत में नजरबन्द हैं, जो लोग धर्म के खातिर कैद में हैं, या वे दासत्व के लिये पकड़े गए हैं।, कि मानो उनके साथ तुम भी कैद हो; और जिनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उनकी भी यह समझकर सुधि लिया करो, कि हमारी भी देह है।