2 हे यहोवा मैं कब तक तेरी दुहाई देता रहूँगा1:2 मैं कब तक तेरी दुहाई देता रहूँगा: भविष्यद्वक्ता यहाँ व्यक्त करता है कि पहले से ही बहुत लम्बा समय हो चूका है और उस लम्बे समय के दौरान वह परमेश्वर को पुकारता है परन्तु कोई परिवर्तन नहीं हुआ।, और तू न सुनेगा? मैं कब तक तेरे सम्मुख "उपद्रव", "उपद्रव" चिल्लाता रहूँगा? क्या तू उद्धार नहीं करेगा? 3 तू मुझे अनर्थ काम क्यों दिखाता है? और क्या कारण है कि तू उत्पात को देखता ही रहता है? मेरे सामने लूट-पाट और उपद्रव होते रहते हैं; और झगड़ा हुआ करता है और वाद-विवाद बढ़ता जाता है।
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