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Jonas 3

आजनन

1 तब यहयह वचन सरपहुँा, 2 "उठकर उस बड़े नगर नवा, और ैं कहूँा, उसकउसमें रचकर" 3 तब यहवचन अननवगय3:3 तब यहवचन अननवगया: पहलवह आजनननहीं परनअब ा। नवएक बहबड़ा नगर ा, वह िा। 4 और नगर ें रवकरकएक िी, और यह रचकरतगया, "अब ितनपर नवउलट िएगा।" 5 तब नवमनों परमवर वचन पर ििा; और उपवरचिगयऔर बड़े कर तक सभओढ़ा। (मत12:41)

6 तब यह समनवें पहुँा; और उसनिंसन पर उठ, अपनजकओढउतरकर ओढिा, और पर गया। 7 अपनरधों सममति कर नवें इस आजिंिटवा, "मन, य-ब, ़-बकरी, और पशु, ँ; और ँ। 8 और मनऔर पशों ओढ़ें, और परमवर ििकर ें; और अपनिें; और उस उपदरव े, करतैं, पशकरें। 9 समभव ै, परमवर दयकरऔर अपनइचबदल े, और उसकभडऔर हम बच ँ।"

10 जब परमवर उनकों ा, ि िरहैं, तब परमवर अपनइचबदल ी, और उनकि करनी, उसकि3:10 उनकी जो हानि करने की ठानी थी, उसको न किया: यहाँ पर यहोवा की चेतावनी का उद्देश्य था कि वह जो चेतावनी दे रहा है उसे करना न पड़े।

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