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João 1

आदि ें वचन

1 आदि ें 1:1 आदि में: इसका अर्थ यह है कि संसार की सृष्टि के पहले से ही "वचन" का अस्तित्व था। वचन यूनानी में यह ‘लोगोस’ के रूप में जाना जाता हैं, एक ‘वचन’ जिसके द्वारा हम दूसरों से बातचीत करते हैं। वचन ा, और वचन परमवर ा, और वचन परमवर ा। 2 यहआदि ें परमवर ा। 3 सब उसउतपनऔर उतपनै, उसमें वसउसकिउतपन4 उसमें वन 1:4 उसमें जीवन था: परमेश्वर "जीवन" है या "जीवित" परमेश्वर है, घोषित किया गया हैं, क्योंकि वह स्रोत या जीवन का सोता है; और वह वन मनों ि ा। 5 और ि धकें चमकतै; और धकउसरहण िा।

6 एक मनपरमवर ओर , िसकहना। 7 यह गवआया, ि ि गवे, ि सब उसकिँ। 8 वह आप वह ि ा, परनउस ि गविआया।

9 सचि हर एक मनरकिकरतै, जगत ें आनी। 10 वह जगत ें ा, और जगत उसकउतपन, और जगत उसनहीं पहचा। 11 वह अपनघर ें आयऔर उसकअपनों उसरहण नहीं िा। 12 परनितनों उसरहण िा, उसनउनें परमवर सनअधििा, अरउनें उसकपर िरखतैं 13 लहे, शरइचे, मनइचे, परनपरमवर उतपनैं।

14 और वचन हध; और अनरह और सचपरिकर हमें िा, और हमनउसकऐसमहिी, िएकलमहिा। (1 . 4:9) 15 हनउसकिषय ें गवी, और रकर कहा, "यह वहै, िसकैंवरणन िा, ि रहै, वह झसबढकर ै, ोंि वह झसपहला।" 16 ोंि उसकपरिणतहम सब िअरअनरह पर अनरह17 इसलिि यवसगई, परनअनरह और सचमसपहुँी। 18 परमवर िकभनहीं 1:18 परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा: यह घोषणा सम्भवतः किसी भी पिछले वितरण से ऊपर यीशु के रहस्योद्घाटन की श्रेष्ठता दिखाने के लिए की गई है, एकलिें ैं, उसउसरगट िा।

हनबपतिगव

19 हनगवयह ै, ि जब यहिों यरशलजकों और िों उससयह छनिा, "ै?" 20 उसनयह िा, और इननहीं िा, परनि"ैं मसनहीं ूँ।" 21 तब उनोंउससा, "िै? एलिै?" उसनकहा, "ैं नहीं ूँ।" "वह भवियदवकै?" उसनउततर िा, "नहीं।" 22 तब उनोंउससा, "ि? ि हम अपनजनों उततर ें। अपनिषय ें कहतै?" 23 उसनकहा, "यशभवियदवककहै, ैं गल ें एक रनशबूँ ि रभकरो।’" (यशा. 40:3)

24 फरिों ओर गए े। 25 उनोंउससयह रशा, "यदि मसै, और एलि, और वह भवियदवकै, िबपतिों ै?" 26 हनउनकउततर िा, "ैं जल बपतिूँ, परनें एक यकि खड़ा ै, िनहीं नते। 27 अरआनै, िसकैं लननहीं।" 28 ें यरदन तनिें ं, जहाँ हनबपतिा।

परमवर

29 सरिउसनअपनओर आतखकर कहा, "ो, यह परमवर 1:29 परमेश्वर का मेम्ना: एक "मेम्ना" यहूदियों के बीच, मिस्र से अपने उद्धार के उपलक्ष्य में फसह पर मारा और खाया जाता था। निर्गमन 12:3-11 ै, जगत हरतै। (1 पत. 1:19, यशा. 53:7) 30 यह वहै, िसकिषय ें ैंकहा, ि एक आतै, झसै, ोंि वह झसपहला। 31 और ैं उसपहचनता, परनइसलिैं जल बपतिआया, ि वह इसएल पर रगट " 32 और हनयह गवी, "ैंआतकबतर ें आकउतरतै, और वह उस पर ठहर गया। 33 और ैं उसपहचनतनहीं ा, परनिसनजल बपतिा, उसझसकहा, िपर आतउतरतऔर ठहरते; वहपविआतबपतिै।’ 34 और ैंा, और गवि यहपरमवर ै।" (भज. 2:7)

रथम

35 सरििहनऔर उसकों ें जन खड़े े। 36 और उसनपर रहा, ि करककहा, "ो, यह परमवर ै।" 37 तब ों उसकनकर ि38 कर और उनकआतखकर उनसकहा, "िसकें ो?" उनोंउससकहा, "रबी, (अरु), कहाँ रहतै?" 39 उसनउनसकहा, "चलो, े।" तब उनोंआकर उसकरहना, और उस िउसरहे; और यह दसवें लगभग ा।

40 उन ों ें े, हननकर िे, एक शमपतरस अनिा। 41 उसनपहलअपनसगशमिलकर उससकहा, "हमकिअरमसिगया।" (. 4:25) 42 वह उसा: उस पर ि करककहा, "हनशमै, 1:42 ा: यह एक ििएक शबै, उससमें इसकमतलब पतरस, एक पतथर ै। अरपतरस कहलएगा।"

ििऔर नतनएल

43 सरिगला, और िििलकर कहा, "े।" 44 ििअनिऔर पतरस नगर तसिा। 45 ििनतनएल िलकर उससकहा, "िसकवरणन यवसें और भवियदवकिै, वह हमकिगया; वह , सरै।" (मत21:11) 46 नतनएल उससकहा, "अचवससरत िकल सकतै?" ििउससकहा, "चलकर े।" 47 नतनएल अपनओर आतखकर उसकिषय ें कहा, "ो, यह सचमइसएलै: इसमें कपट नहीं।" 48 नतनएल उससकहा, "नतै?" उसकउततर िा, "इससपहलि ििा, जब तला, तब ैंा।" 49 नतनएल उसकउततर िा, "रबी, परमवर े; इसएल महै।" 50 उसकउततर िा, "ैंकहा, ि ैंतला, इसलििकरतै? इससबड़े-बड़े ा।" (. 11:40) 51 िउससकहा, "ैं सच-सच कहतूँ ि वर, और परमवर वरगदों ऊपर और मनऊपर उतरते।" (उत. 28:12)

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