मरियम द्वारा परमेश्वर की स्तुति
46 तब मरियम ने कहा,
"मेरा प्राण प्रभु की बड़ाई करता है।
47 और मेरी आत्मा मेरे उद्धार करनेवाले
परमेश्वर से आनन्दित हुई। (1 शमू. 2:1)
48 क्योंकि उसने अपनी दासी की दीनता पर
दृष्टि की है;
इसलिए देखो, अब से सब युग-युग
के लोग मुझे धन्य कहेंगे। (1 शमू. 1:11, लूका 1:42, मला. 3:12)
49 क्योंकि उस शक्तिमान ने मेरे लिये बड़े-
बड़े काम किए हैं, और उसका नाम पवित्र है।