जक्कई के घर यीशु
1 वह यरीहो में प्रवेश करके जा रहा था। 2 वहाँ जक्कई19:2 जक्कई: यह इब्रानी नाम है और इसका अर्थ "शुद्ध" है। नामक एक मनुष्य था, जो चुंगी लेनेवालों का सरदार और धनी था। 3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है? परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था। 4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि यीशु उसी मार्ग से जानेवाला था। 5 जब यीशु उस जगह पहुँचा, तो ऊपर दृष्टि करके उससे कहा, "हे जक्कई, झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है।" 6 वह तुरन्त उतरकर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया।
7 यह देखकर सब लोग कुड़कुड़ाकर कहने लगे, "वह तो एक पापी मनुष्य के यहाँ गया है।"
8 जक्कई ने खड़े होकर प्रभु से कहा, "हे प्रभु, देख, मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूँ, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय करके ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूँ।" (निर्ग. 22:1) 9 तब यीशु ने उससे कहा, "आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिए कि यह भी अब्राहम का एक पुत्र19:9 अब्राहम का एक पुत्र: यद्यपि एक यहूदी, अभी तक वह एक पापी है वह अब्राहम का पुत्र कहलाने के योग्य नहीं था है। 10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूँढ़ने और उनका उद्धार करने आया है।" (मत्ती 15:24, यहे. 34:16)